क्वार्टर फाइनल में घुटने की चोट ने सेमीफाइनल में प्रदर्शन प्रभावित किया: पिंकी
क्वार्टर फाइनल में घुटने की चोट ने सेमीफाइनल में प्रदर्शन प्रभावित किया: पिंकी
नागोया, 28 सितंबर (भाषा) एशियाई खेलों में सोमवार को कांस्य पदक जीतकर भारत की सबसे सफल कुराश खिलाड़ी बनने वाली पिंकी बलहारा सेमीफाइनल मुकाबले के बाद फूट-फूटकर रो रही थीं और ये आंसू चोटिल घुटने के कारण बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाने की निराशा के थे।
भारत की सबसे सफल कुराश खिलाड़ियों में शामिल पिंकी ने बताया कि दक्षिण कोरिया की लिम गारम के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले के दौरान उनके दाएं घुटने पर चोट लगी थी। सेमीफाइनल में एक अन्य कोरियाई खिलाड़ी सुमिन मो के खिलाफ मुकाबले में चोटिल घुटना उनके लिए परेशानी का सबब बना और वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सकीं।
पिंकी ने पीटीआई से कहा, ‘‘क्वार्टर फाइनल मुकाबले में मुझे चोट लग गई थी। मेरे घुटने पर चोट लगी। क्वार्टर फाइनल में मेरी प्रतिद्वंद्वी भी कोरियाई थी। इसलिए सेमीफाइनल की मेरी प्रतिद्वंद्वी को पता था कि मेरे दाएं घुटने में चोट लगी है।’’’
उन्होंने आंसुओं को रोकते हुए कहा, ‘‘मैं आक्रमण कर रही थी, लेकिन वह बार-बार मेरे घुटने पर हमला कर रही थी। इसलिए मैं पेनल्टी के कारण हार गई।’’
कुराश उज्बेकिस्तान की पारंपरिक कुश्ती और मार्शल आर्ट शैली है, जिसमें खिलाड़ियों को मुक्का मारने, लात चलाने या प्रतिद्वंद्वी के पैर पकड़ने की अनुमति नहीं होती। मुकाबले खड़े होकर होते हैं और अंक हासिल करने के लिए खिलाड़ी को प्रतिद्वंद्वी को पूरी ताकत और नियंत्रण के साथ पीठ के बल गिराना होता है।
दिल्ली की रहने वाली पिंकी ने 2018 एशियाई खेलों में 52 किग्रा भार वर्ग में रजत पदक जीता था, लेकिन इस बार वह 78 किग्रा भार वर्ग में उतरीं। हांगझोउ एशियाई खेलों 2023 में उनका अभियान क्वार्टर फाइनल से आगे नहीं बढ़ सका था।
उन्होंने कहा, ‘‘ 78 किग्रा वर्ग में यह मेरा सिर्फ दूसरा मुकाबला था। इससे पहले मैंने मई में उज्बेकिस्तान में एशियाई चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था। 78 किग्रा में वह मेरा पहला मुकाबला था।’’’
पिंकी के प्रशिक्षण का ज्यादातर हिस्सा लड़कों के साथ मुकाबले करते हुए गुजरता है और उनका मानना है कि इससे उन्हें देश की सबसे सफल कुराश खिलाड़ियों में शामिल होने में मदद मिली।
भारत में कुराश का कोई मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय महासंघ नहीं है और इससे जुड़े पक्षों के बीच लगातार मतभेद के कारण खिलाड़ियों को निजी सहयोग पर निर्भर रहना पड़ता है। पिंकी को भी दिल्ली स्थित अपने मामा की अकादमी से ही प्रशिक्षण और सहयोग मिलता है।
पिंकी मुनिरका स्थित बाबा गंगनाथ जूडो एवं कुराश अकादमी में प्रशिक्षण लेती हैं, जिसका संचालन जाने-माने जूडो और कुराश कोच समुदंर तोकस करते हैं। तोकस कोच बनने से पहले तोकस राष्ट्रीय स्तर के जूडो चैंपियन रह चुके हैं
पिंकी ने पीटीआई से विशेष बातचीत में कहा, ‘‘मैंने दिल्ली के मुनिरका स्थित अपनी अकादमी में प्रशिक्षण लिया, जिसे मेरे मामा समुदंर तोकस चलाते हैं। मुझे बाहर से कोई सहयोग या अवसर नहीं मिला। अकादमी में मेरे सभी अभ्यास साथी लड़के हैं। मैंने प्रतियोगिताओं के अलावा कभी लड़कियों के साथ मुकाबला नहीं किया। इससे मुझे मदद मिलती है।’’
पिंकी ने कहा, ‘‘ मैं अपने मामा को जूडो खेलते हुए देखकर बड़ी हुई हूं, इसलिए नौ साल की उम्र में जूडो शुरू किया। वह मेरे नाना के नाम पर एक स्मृति प्रतियोगिता भी आयोजित करते थे।’’
2018 एशियाई खेलों से पहले पिता को खो चुकी पिंकी ने कहा, ‘‘लेकिन भारत में एक नियम है कि केवल एक ही मार्शल आर्ट खेल खेला जा सकता है। इसलिए मैंने कुराश चुना। मैं कुराश में रैंकिंग वाली खिलाड़ी हूं।’’
पिंकी ने कहा कि प्रत्येक एशियाई खेल से पहले एक नया महासंघ सामने आ जाता है, लेकिन खिलाड़ियों के हितों के लिए कोई ठोस काम नहीं होता।
उन्होंने अपने पिछले एशियाई खेलों के अनुभव को याद करते हुए कहा, ‘‘जैसे ही एशियाई खेल आते हैं, एक नया महासंघ बन जाता है। लेकिन इससे खिलाड़ियों का नुकसान होता है। महासंघ तो हमेशा बने रहेंगे। 2023 में हमें गुमराह किया गया था। इसी वजह से मुझे अयोग्य घोषित कर दिया गया था।’’
भाषा
आनन्द मोना
मोना

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