पुरुष एकल में वर्चस्व का दौर खत्म, खिलाड़ियों ने कहा

पुरुष एकल में वर्चस्व का दौर खत्म, खिलाड़ियों ने कहा

पुरुष एकल में वर्चस्व का दौर खत्म, खिलाड़ियों ने कहा
Modified Date: August 24, 2026 / 05:35 pm IST
Published Date: August 24, 2026 5:35 pm IST

नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) फ्रांस के नए विश्व चैंपियन एलेक्स लेनियर और विश्व रैंकिंग में सातवें स्थान पर काबिज विक्टर लाई समेत कई शीर्ष खिलाड़ियों का मानना है कि पुरुष एकल बैडमिंटन में अब मुकाबला पहले की तुलना में काफी खुला हो गया है और दावेदारों की संख्या बढ़ने के कारण लंबे समय तक किसी एक खिलाड़ी का दबदबा बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है।

इसका प्रमाण शीर्ष खिलाड़ियों की लंबी सूची ही नहीं है बल्कि लगभग हर बड़े टूर्नामेंट के नतीजों में दिखने वाली अनिश्चितता भी है। शीर्ष खिलाड़ियों और उन्हें चुनौती देने वाले खिलाड़ियों के बीच का अंतर काफी कम हुआ है। साथ ही आधुनिक पुरुष एकल खेल में बढ़ती शारीरिक चुनौतियों के कारण पूरे सत्र में लगातार अच्छा प्रदर्शन करना भी मुश्किल हो गया है।

यह पूछे जाने पर कि क्या ली चोंग वेई, लिन डैन या विक्टर एक्सेलसन जैसे खिलाड़ियों की तरह लंबे समय तक दबदबा कायम करना अब संभव है, लेनियर ने कहा, ‘‘यह मुश्किल सवाल है लेकिन मुझे निश्चित रूप से लगता है कि यह अलग दौर है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आज पहले से ज्यादा टूर्नामेंट होते हैं और अच्छे खिलाड़ियों की संख्या भी अधिक है। हम पहले दौर में ही हार सकते हैं और शुरुआती दौर का मुकाबला भी काफी कड़ा होता है।’’

यहां विश्व चैंपियनशिप में खिलाड़ियों की गहराई विशेष रूप से देखने को मिली। भारत के विश्व रैंकिंग में 22वें नंबर के खिलाड़ी आयुष शेट्टी ने पहले दौर में गत चैंपियन और विश्व नंबर एक शी यु कि को हराकर बड़ा उलटफेर किया। वहीं डेनमार्क के विश्व रैंकिंग में 26वें स्थान के रासमुस गेमके ने ऑल इंग्लैंड चैंपियन लिन चुन-यी को हराया। इंडोनेशिया के विश्व नंबर तीन जोनाथन क्रिस्टी भी उलटफेर का शिकार हुए।

विश्व चैंपियनशिप में पुरुष एकल खिताब जीतने वाले पहले फ्रांसीसी खिलाड़ी बने लेनियर ने कहा कि प्रतियोगिता में बढ़ती गहराई के कारण लगातार कई सप्ताह तक जीत दर्ज करना काफी मुश्किल हो गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘पुरुष एकल में एक टूर्नामेंट जीतने के बाद अगले सप्ताह फिर दूसरा टूर्नामेंट जीतना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। अच्छे खिलाड़ियों की संख्या बढ़ी है और जीतना बहुत कठिन है।’’

लेनियर ने कहा, ‘‘मैं यह नहीं कह सकता कि भविष्य में फिर कभी किसी का दबदबा नहीं होगा लेकिन मेरे लिए इस समय उस तरह का दबदबा कायम करना शायद ज्यादा मुश्किल है। हालांकि इसकी संभावना अभी बनी हुई है।’’

युवा पीढ़ी के एक अन्य खिलाड़ी विक्टर लाई ने भी यही राय जताई। उन्होंने कहा कि शीर्ष खिलाड़ियों और अन्य खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा का अंतर लगभग खत्म हो गया है।

लाई ने कहा, ‘‘शीर्ष 30 में शामिल कोई भी खिलाड़ी किसी को भी हरा सकता है। जब मैं पहली बार शीर्ष 30 में पहुंचा था तभी से यह कह रहा हूं। कोई मुकाबला आसान नहीं है। जैसा आपने कल देखा गेमके क्वार्टर फाइनल में पहुंचे और उनकी रैंकिंग 20 के आसपास है। इससे साबित होता है कि शीर्ष 30 में कोई भी खिलाड़ी किसी को भी हरा सकता है। यह उस दिन के प्रदर्शन पर निर्भर करता है।’’

लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाले लाई जनवरी में शीर्ष 20 में पहुंचे थे और अब विश्व रैंकिंग में सातवें स्थान पर हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा पुरुष एकल में किसी एक खिलाड़ी का दबदबा नहीं होना इसकी प्रमुख विशेषताओं में से एक है।

यह पूछे जाने पर कि क्या मौजूदा पीढ़ी का कोई खिलाड़ी अगले पांच साल में ऐसा दबदबा कायम कर सकता है, लाई ने इस पर संदेह जताया।

उन्होंने कहा, ‘‘ईमानदारी से कहूं तो मुझे नहीं लगता कि एक खिलाड़ी इतना दबदबा कायम कर पाएगा। एलेक्स और मेरे जैसे कई युवा खिलाड़ी हैं। भारत के आयुष और इंडोनेशिया के अल्वी भी हैं। ये तो कुछ ही नाम हैं। अभी कई ऐसे खिलाड़ी आ रहे हैं जिनके बारे में शायद हमने सुना भी नहीं है, लेकिन जल्द ही उनके बारे में सुनेंगे। मुझे नहीं लगता कि भविष्य में कोई एक खिलाड़ी दबदबा कायम कर पाएगा।’’

डेनमार्क के अनुभवी खिलाड़ी एंडर्स एंटोनसन ने मौजूदा स्थिति को संक्षेप में बताते हुए कहा, ‘‘इस समय कड़ी प्रतिस्पर्धा है। कई अलग-अलग देशों के बहुत मजबूत खिलाड़ी हैं। इसलिए पुरुष एकल के लिए यह दिलचस्प समय है।’’

विश्व के पूर्व शीर्ष 10 खिलाड़ियों में शामिल विटिंगहस ने कहा कि आधुनिक खेल एक दशक पहले की तुलना में शारीरिक रूप से काफी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है।

चालीस वर्षीय विटिंगहस ने कहा, ‘‘यह लगातार ज्यादा शारीरिक होता जा रहा है। मुझे लगता है कि खिलाड़ियों के लिए यह अच्छा होगा कि जल्द ही मुकाबले 21 के बजाय 15 अंक के हों।’’

भाषा सुधीर आनन्द

आनन्द


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