भारत के लिए मिश्रित नतीजे: रिकर्व जोड़ी ने पदक पक्का किया, टीम चयन पर सवाल उठे

भारत के लिए मिश्रित नतीजे: रिकर्व जोड़ी ने पदक पक्का किया, टीम चयन पर सवाल उठे

भारत के लिए मिश्रित नतीजे: रिकर्व जोड़ी ने पदक पक्का किया, टीम चयन पर सवाल उठे
Modified Date: June 11, 2026 / 10:06 pm IST
Published Date: June 11, 2026 10:06 pm IST

अंताल्या, 11 जून (भाषा) धीरज बोम्मादेवरा और उभरती हुई तीरंदाज कुमकुम मोहोद ने बृहस्पतिवार को तीरंदाजी विश्व कप के तीसरे चरण रिकर्व मिश्रित युगल फाइनल में पहुचकर भारत के लिए पहला पदक पक्का कर लिया।

लेकिन टीम स्पर्धाओं में निराशाजनक नतीजों के बाद भारत की एशियाई खेलों को ध्यान में रखकर अपनाई गई टीम चयन नीति पर सवाल उठने लगे हैं और इसकी आलोचना जारी है।

मिश्रित जोड़ी स्वर्ण पदक मुकाबले में मजबूत दक्षिण कोरियाई जोड़ी से भिड़ेगी तो वहीं अच्छी क्वालीफिकेशन रैंकिंग के बावजूद पुरुषों और महिलाओं की रिकर्व टीमें आगे नहीं बढ़ पाईं।

बुधवार को कंपाउंड पुरुषों और महिलाओं की टीम का भी सफर खत्म हो गया और नयी चयन नीति चर्चा का विषय बनी।

महिलाओं की टीम ने शंघाई में पिछले विश्व कप में दीपिका कुमारी की अगुआई में स्वर्ण पदक जीता था। लेकिन टीम को क्वार्टर फाइनल में कम रैंकिंग वाली मेजबान तुर्की की टीम से 1-5 से हार का सामना करना पड़ा।

इस नतीजे ने एक बार फिर भारत के उस फैसले की ओर ध्यान गया जिसके तहत सिर्फ उन्हीं तीरंदाजों को उतारा गया जिन्हें एशियाई खेलों की टीम के लिए चुना गया था, भले ही उनके क्वालीफिकेशन के नतीजे कुछ भी रहे हों।

नयी नीति के अंतर्गत चार बार की ओलंपियन दीपिका को टीम स्पर्धा से बाहर रखा गया क्योंकि उन्होंने पिछले महीने हुए ट्रायल्स में एशियन खेलों की टीम में जगह नहीं बनाई थी।

इसके बजाय भारत ने कुमकुम, अंकिता भकत और कीर्ति शर्मा को उतारा। कीर्ति क्वालीफिकेशन में 43वें स्थान पर रही थीं जबकि अंकिता कुल मिलाकर 21वें स्थान पर थीं।

तीसरी वरीयता प्राप्त भारतीय तिकड़ी ने अच्छी क्वालिफिकेशन रैंकिंग से पहले दौर में ‘बाय’ मिलने के बाद नीदरलैंड्स पर 6-0 की शानदार जीत के साथ शुरुआत की।

लेकिन उन्हें तुर्की की एलिफ गोकिर, दुनिया येनिहायत और कानसे दुरु ताराकसी की टीम के खिलाफ संघर्ष करना पड़ा और वे क्वार्टर फाइनल में 1-5 से हार गईं।

हालांकि दीपिका ने अपना व्यक्तिगत अभियान जारी रखा और कुमकुम, अंकिता और कीर्ति के साथ तीसरे दौर में पहुंच गईं।

दूसरी ओर पुरुष टीम शुरुआती दौर में ही बाहर हो गई।

ओलंपियन अतनु दास को टीम स्पर्धा के लिए नहीं चुना गया क्योंकि वह एशियाई खेलों में जाने वाली टीम का हिस्सा नहीं थे। उनकी जगह यशदीप भोग ने धीरज और नीरज चौहान के साथ टीम बनाई।

सातवीं वरीयता प्राप्त भारतीय टीम शुरुआती दौर में ही अमेरिका से शूटऑफ में 4-5 से हारकर बाहर हो गई।

आखिरकार भारत दोनों कंपाउंड टीम स्पर्धा में कोई पदक नहीं जीत सका।

अगले महीने मैड्रिड में होने वाले विश्व कप के चौथे चरण में भी यही नीति अपनाए जाने की उम्मीद है। 19 सितंबर से चार अक्टूबर तक आइची और नागोया में होने वाले एशियाई खेलों से पहले का आखिरी बड़ा टूर्नामेंट है।

हालांकि दिन की अच्छी खबर रिकर्व मिश्रित टीम स्पर्धा से आई।

तीसरी वरीयता प्राप्त धीरज और कुमकुम ने पहला सेट हारने के बाद वापसी की और सेमीफाइनल में जर्मनी की कैथरीना बाउर और मोरित्ज वाइजर को 6-2 से हराया।

इससे पहले उन्होंने ‘बाय’ मिलने के बाद डेनमार्क के खिलाफ सीधे सेटों में जीत के साथ अपने अभियान की शुरुआत की थी और फिर क्वार्टर फाइनल में अमेरिका को 6-2 से हराया।

हालांकि कंपाउंड मिश्रित टीम का अभियान क्वार्टर फाइनल में ही खत्म हो गया। ज्योति सुरेखा वेन्नम और साहिल जाधव को अमेरिकी खिलाड़ियों सवाना ओडोनोहो और कर्टिस ब्रॉडनैक्स से 154-156 से हार का सामना करना पड़ा।

भाषा नमिता

नमिता


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