पैसे या भव्य परेड नहीं, बस चाहता हूं कि सभी खेलों की सफलता का जश्न मने: सात्विक

पैसे या भव्य परेड नहीं, बस चाहता हूं कि सभी खेलों की सफलता का जश्न मने: सात्विक

पैसे या भव्य परेड नहीं, बस चाहता हूं कि सभी खेलों की सफलता का जश्न मने: सात्विक
Modified Date: May 8, 2026 / 01:32 pm IST
Published Date: May 8, 2026 1:32 pm IST

नयी दिल्ली आठ मई (भाषा) स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी ने शुक्रवार को कहा कि थॉमस कप में भारतीय टीम द्वारा कांस्य पदक जीतने के बाद जनता की फीकी प्रतिक्रिया पर की गई उनकी हालिया टिप्पणी का उद्देश्य ‘पैसे या भव्य स्वागत’ की मांग करना नहीं था, बल्कि लोगों से सभी खेलों में ‘हर छोटी-बड़ी जीत का जश्न मनाने’ की अपील करना था।

विश्व रैंकिंग में चौथे स्थान पर काबिज एशियाई खेलों के चैंपियन सात्विक और चिराग शेट्टी की जोड़ी हाल ही में डेनमार्क में आयोजित थॉमस कप में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थी।

सात्विक ने हालांकि स्वदेश लौटने पर सोशल मीडिया पर उनकी उपलब्धि को अपेक्षित पहचान न मिलने को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त की थीं।

डेनमार्क से वापस आने के बाद सात्विक ने लिखा था, ‘‘अब घर वापस आ गया हूं। हमेशा की तरह, पिछले दो सप्ताहों में क्या हुआ, यह किसी को पता नहीं है और ऐसा लगता है कि किसी को वास्तव में इसकी परवाह भी नहीं है।’’

इस 25 साल के खिलाड़ी ने शुक्रवार को अपने विचारों को और स्पष्ट करने के लिए एक और सोशल मीडिया पोस्ट साझा किया।

उन्होंने लिखा, ‘‘पिछले कुछ दिनों में थॉमस कप कांस्य पदक को लेकर मेरी टिप्पणियों पर काफी ध्यान दिया गया। मैं लोगों के समर्थन और प्रोत्साहन के लिए आभारी हूं, लेकिन मैं अपने इरादे को स्पष्ट करना चाहता हूं क्योंकि कई लोग मूल मुद्दे से भटकते नजर आ रहे हैं।’’

उन्होंने लिखा, ‘‘मेरे शब्द व्यक्तिगत प्रसिद्धि पाने या किसी और की उपलब्धियों का श्रेय कम करने की भावना से नहीं आए थे। मैं हर उस खिलाड़ी का बेहद सम्मान करता हूं जो किसी भी खेल में भारत का नाम रोशन करता है।’’

सात्विक ने कहा, ‘‘मेरा संदेश केवल इतना था कि हमें ऐसी संस्कृति विकसित करनी चाहिए, जहां हर छोटी या बड़ी जीत का उत्साहपूर्वक से जश्न मनाया जाए।’’

उन्होंने कहा कि थॉमस कप जैसे टूर्नामेंट में उत्कृष्ट प्रदर्शन खिलाड़ियों के वर्षों के त्याग और कठिन मेहनत का परिणाम होता है और जब ऐसी उपलब्धियों पर ‘चुप्पी छा जाती’ है तो यह ‘बेहद निराशाजनक’ लगता है।

उन्होंने लिखा, ‘‘चाहे वह विश्व कप का पदक हो या थॉमस कप जैसे वैश्विक टूर्नामेंट में पोडियम फिनिश, ये पल वर्षों की मेहनत और बलिदान का प्रतिनिधित्व करते हैं।’’

इस खिलाड़ी ने कहा, ‘‘जब ऐसी उपलब्धियों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती, तो यह सिर्फ हमारे लिए ही नहीं बल्कि भविष्य के खिलाड़ियों के लिए भी निराशाजनक होता है, जो हमें देखकर प्रेरणा लेते हैं।’’

सात्विक ने कहा, ‘‘हमें न पैसे चाहिए, न भव्य परेड; हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि हमारा देश हमें देखे और हमारे प्रयासों को महसूस करे। चलिए हम सभी खेलों को समान उत्साह और जुनून के साथ समर्थन दें।’’

उनकी भावनाओं का समर्थन उनके जोड़ीदार चिराग ने भी किया। चिराग ने देश के खेल प्रेमियों से अपील की कि वे हर उस खिलाड़ी का सम्मान करें जो भारत की जर्सी पहनकर देश का प्रतिनिधित्व करता है।

उन्होंने कहा, ‘‘अगली बार यह चर्चा न हो कि किसने ज्यादा या कम जीता, बल्कि हर उस खिलाड़ी का जश्न मनाया जाए जो भारत की जर्सी पहनता है।’’

भाषा आनन्द पंत

पंत


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