पायल नाग ने तय किया वायरल ट्वीट से विश्व पैरा तीरंदाजी सीरीज में स्वर्ण का सफर

पायल नाग ने तय किया वायरल ट्वीट से विश्व पैरा तीरंदाजी सीरीज में स्वर्ण का सफर

पायल नाग ने तय किया वायरल ट्वीट से विश्व पैरा तीरंदाजी सीरीज में स्वर्ण का सफर
Modified Date: April 13, 2026 / 09:53 pm IST
Published Date: April 13, 2026 9:53 pm IST

(हिमांक नेगी)

नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) सोशल मीडिया पर एक अचानक की गई पोस्ट ने अपने हाथ-पैर गंवा चुकी पैरा तीरंदाज पायल नाग को एक ऐसे रास्ते पर डाल दिया जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। अब इस युवा खिलाड़ी ने बैंकॉक में हुई विश्व पैरा तीरंदाजी सीरीज में उसी पल को स्वर्ण पदक में बदल दिया है।

पायल ने पीटीआई वीडियोज को इस खेल में अपनी अप्रत्याशित यात्रा के बारे में बताया, ‘‘मुझे तीरंदाजी के बारे में कुछ भी नहीं पता था। मैं चित्रकला करती थी और किसी ने उसे ट्विटर (एक्स) पर पोस्ट कर दिया। मेरे कोच ने उसे देखा और 2023 में मुझे अकादमी ले आए। इस तरह मैंने शुरुआत की।’’

वहां से पायल ने बहुत तेजी से प्रगति की लेकिन यह बिल्कुल भी आसान नहीं था।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे लिए जरूरी उपकरण बनवाने में बहुत मुश्किलें आईं इसलिए सीखने में समय लगा। मैं अपने दोनों पैरों से तीर चलाती थी लेकिन इसकी इजाजत नहीं थी। फिर भी मैंने हार नहीं मानी और पदक जीते।’’

बैंकॉक में सबसे खास बात यह रही कि फाइनल मुकाबले में अपनी आदर्श शीतल देवी के सामने भी पायल ने संयम बनाए रखा।

पायल ने उलटफेर करते हुए दुनिया की नंबर एक और कई पदक जीत चुकी टीम क अपनी साथी शीतल को हराकर स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही उन्होंने बैंकॉक में हुई विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज में भारत के शानदार प्रदर्शन की अगुवाई की जहां देश ने कुल सात स्वर्ण पदक जीतकर पहला स्थान हासिल किया।

पायल ने कहा, ‘‘मैंने यह नहीं सोचा कि वह मेरी आदर्श हैं या मेरी दोस्त हैं। अगर मैं मुकाबले के दौरान इन सब बातों के बारे में सोचती तो शायद मैं पदक नहीं जीत पाती। मैं खुद से बस यही कह रही थी – पायल तुम्हें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने बस इस बात पर ध्यान दिया कि मैं वैसे ही प्रदर्शन करूं जैसा मैं अभ्यास के दौरान करती हूं, ना कि इस बात पर कि मेरे सामने कौन है। मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब रही।’’

अपने सभी हाथ-पैरा गंवाने वाली दुनिया की पहली पैरा तीरंदाज पायल ने अपने हादसे के बाद समाज के तानों से उबरने के बारे में भी बात की।

पायल ने कहा, ‘‘लोगों ने कहा था कि मैं कुछ भी नहीं कर पाऊंगी, मेरी जिंदगी खत्म हो चुकी है। मैंने अपनी कमजोरी को ही अपनी ताकत बना लिया। आज वही लोग मुझे देख रहे हैं और यह देखकर मुझे बहुत अच्छा लगता है।’’

अब उनका ध्यान पहले से भी बड़े लक्ष्यों पर केंद्रित हो चुका है।

पायल ने कहा, ‘‘बैंकॉक से लौटने के बाद मैं अगले ही दिन फिर से ट्रेनिंग पर चली गई। मैं घर भी नहीं गई हूं क्योंकि मैं पैरा एशियाई खेलों की तैयारी कर रही हूं। हम देश के लिए पदक जीतने की पूरी कोशिश करेंगे। मेरा सपना भारत के लिए ओलंपिक (पैरालंपिक) में स्वर्ण पदक जीतना है।’’

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय टीम के आस-पास मौजूद सहयोगी प्रणाली को भी दिया।

पायल ने कहा, ‘‘हमारे कोच मैदान के बाहर माता-पिता की तरह हमारा मार्गदर्शन करते हैं और मैदान पर सख्त ट्रेनर की तरह। फाइनल के दौरान मुझे बस यही कहा जा रहा था कि मैं शांत रहूं और ठीक वैसे ही निशाने लगाऊं जैसे मैं अभ्यास में करती हूं।’’

भाषा सुधीर आनन्द

आनन्द


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