अर्जुन पुरस्कार प्राप्त पेंशनभोगी को शुल्क में छूट दिलाने में ईएफआई की भूमिका पर सवाल

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अर्जुन पुरस्कार प्राप्त पेंशनभोगी को शुल्क में छूट दिलाने में ईएफआई की भूमिका पर सवाल

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  • Publish Date - February 24, 2026 / 11:59 AM IST,
    Updated On - February 24, 2026 / 11:59 AM IST

(अमनप्रीत सिंह)

नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) भारतीय घुड़सवारी महासंघ (ईएफआई) ने अर्जुन पुरस्कार विजेता मेजर जनरल दीप अहलावत को एक प्रतियोगिता घोड़े के आयात के लिए सीमा शुल्क में छूट की सुविधा प्रदान की, जबकि वह पेंशनभोगी पूर्व खिलाड़ी हैं जो अब खेल में सक्रिय नहीं हैं। ईएफआई के इस फैसले पर सवाल उठ रहे हैं।

अर्जुन पुरस्कार पेंशन योजना के तहत लाभार्थियों को यह वचन देना होता है कि वे सक्रिय प्रतियोगी नहीं हैं। संन्यास ले चुके घुड़सवार और अर्जुन पुरस्कार विजेता मेजर जनरल अहलावत वर्तमान में इस पेंशन का लाभ उठा रहे हैं।

पीटीआई के पास कुछ दस्तावेज हैं जिनसे पता चलता है कि 26 जून को ईएफआई ने विदेश व्यापार महानिदेशालय को पत्र लिखकर जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, आयरलैंड, इटली, नीदरलैंड, स्पेन, डेनमार्क, बेल्जियम और हंगरी से छह घोड़ों को लाने के लिए उपयुक्त शुल्क रियायतों के साथ आवश्यक आयात लाइसेंस जारी करने का अनुरोध किया था।

महासंघ ने पत्र में कहा कि इस कदम से भारत में घुड़सवारी खेल के विकास में मदद मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने की संभावना में सुधार होगा।

ईएफआई ने नौ सितंबर 2025 को फिर से खेल मंत्रालय को लिखा कि मेजर जनरल अहलावत प्रशिक्षण और विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए दो घोड़ों का आयात करेंगे और उनमें से एक के लिए शुल्क में छूट की जरूरत है।

संघ ने मंत्रालय से सीमा शुल्क छूट प्रमाणपत्र (सीडीईसी) जारी करने का अनुरोध किया था। आयातित घोड़ा वार्मब्लड नस्ल का है जिसका नाम लवली मिस मोनेपेनी है। ईएफआई के इस फैसले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

शुल्क में छूट के साथ प्रतियोगिता घोड़ों के आयात को सुगम बनाना उस पेंशन संबंधी वचन के विपरीत लगता है जिसके तहत पुरस्कार पाने वाले व्यक्ति का सक्रिय खेल से दूर रहना जरूरी होता है। पेंशन के लिए आवेदन करते समय आवेदक को यह वचन देना होता है कि उसने ‘‘सक्रिय खेल करियर से संन्यास ले लिया है।’’

ईएफआई के संयुक्त सचिव के रूप में अहलावत को घोड़े के आयात के लिए सिफारिश करने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल एमएम रहमान ने कहा कि उन्होंने निर्णय लेते समय ईएफआई की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन किया।

रहमान ने पीटीआई से कहा, ‘‘घोड़ों के आयात पर ईएफआई के एसओपी के प्रावधानों के अनुसार फैसला किया गया।’’

एसओपी में हालांकि इसका उल्लेख नहीं है कि क्या किसी संन्यास ले चुके खिलाड़ी को घोड़े के आयात के लिए सुविधा दी जा सकती है।

जब यह बात रहमान को बताई गई, तो उन्होंने कहा, ‘‘वह अपने बेटे (मेजर यशदीप अहलावत) के लिए भी आयात कर सकते हैं, जो सक्रिय घुड़सवार है।’’

एसओपी में हालांकि यह नहीं कहा गया है कि संन्यास ले चुका खिलाड़ी अपने परिवार के लिए घोड़ा आयात कर सकता है।

मेजर जनरल अहलावत से इस मामले पर टिप्पणी के लिए संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

भाषा

पंत

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