विश्व कप सेमीफाइनल से चूकने का दुख एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने की प्रेरणा होना चाहिये : मारिन
विश्व कप सेमीफाइनल से चूकने का दुख एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने की प्रेरणा होना चाहिये : मारिन
(मोना पार्थसारथी)
नयी दिल्ली, 15 सितंबर (भाषा) भारतीय महिला हॉकी टीम के कोच शोर्ड मारिन का मानना है कि विश्व कप सेमीफाइनल से मामूली अंतर से चूकने का दुख उनकी टीम के लिये एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने की प्रेरणा होना चाहिये। हालांकि उन्होंने टीम को विश्व कप में शानदार प्रदर्शन के बाद आत्ममुग्धता से भी बचने की ताकीद की ।
भारतीय महिला हॉकी टीम पिछले महीने विश्व कप में पांचवें स्थान पर रही जो 1974 के बाद टूर्नामेंट में उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है । सलीमा टेटे की कप्तानी वाली टीम टूर्नामेंट में एकमात्र मैच सह मेजबान नीदरलैंड से हारी लेकिन आस्ट्रेलिया से गोलरहित ड्रॉ के बाद सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गई ।
मारिन ने जापान से भाषा को दिये इंटरव्यू में कहा ,‘‘ आपको जीवन में बहुत बार विश्व कप खेलने का मौका नहीं मिलता । पदक के इतने करीब पहुंचकर चूकना निराशाजनक है । मैने उनसे कहा कि विश्व कप सेमीफाइनल से चूकने को एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने की प्रेरणा समझो ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ हमने विश्व कप में इतिहास रचा । यह महत्वपूर्ण है कि वे समझें कि उन्होंने कुछ असाधारण किया है जो 1974 के बाद कभी नहीं हुआ । अब लक्ष्य एशियाई खेल है जिसमें और बेहतर करना है ।’’
उन्होंने कहा कि एशियाई खेलों में चुनौती अलग होगी जिसमें भारत का सामना निचली रेंकिंग वाले प्रतिद्वंद्वियों से होगा ।
मारिन ने कहा ,‘‘ विश्व कप में हमारे पूल में दक्षिण अफ्रीका को छोड़कर शीर्ष रैंकिंग वाली टीमें थी लेकिन यहां ऐसा नहीं है । हमें निचली रैंकिंग वाली टीमों से खेलना है और गोल करने के मौके अधिक होंगे । हमें इसमें प्रभावी होना होगा ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ हमें फोकस बनाये रखकर बेहतरीन खेल दिखाना होगा । फोकस अपने प्रदर्शन पर रहना चाहिये कि पिछले मैच से क्या बेहतर कर सकते हैं । पिछला मैच विश्व कप में जर्मनी के खिलाफ था । अब अगला मैच एशियाई खेल में उजबेकिस्तान से है और हमें देखना होगा कि उसमें बेहतर प्रदर्शन कैसे हो ।’’
तोक्यो ओलंपिक 2020 में भारतीय महिला टीम को ऐतिहासिक चौथे स्थान तक ले जाने वाले 52 वर्ष के कोच ने कहा कि वह विश्व कप के प्रदर्शन के बाद अपेक्षाओं को दबाव नहीं बल्कि तारीफ के तौर पर लेते हैं ।
उन्होंने कहा ,‘‘ यह अच्छी बात है कि हम उस स्थिति में हैं कि लोग हमसे अपेक्षा कर रहे हैं । यह दबाव नहीं बल्कि तारीफ है । मानसिक पहलू अहम है कि हम अपने काम पर और आगामी चुनौतियों पर फोकस रखें । अगर ऐसा कर सके तो अच्छा नतीजा मिलने के मौके अधिक और बेहतर होंगे ।’’
मारिन ने जापान के मौसम के अनुकूल ढलने को भी अहम बताया जहां यूरोप की तुलना में उमस अधिक है । उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि अलग अलग हालात में ढलना टीम के लिये चिंता का सबब नहीं है क्योंकि सभी को इसकी आदत है ।
उन्होंने कहा ,‘‘ जापान में उमस अधिक है जिससे यहां के मौसम के अनुसार ढलना अहम था ।हम आस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और यूरोप में खेलकर आये हैं तो अलग हालात के अनुरूप ढलना मुश्किल नहीं है । हमने यहां जल्दी आने के बाद मिनी गोल्फ और अलग अलग ‘टीम एक्टिविटी’ में भाग लिया । यह अच्छी बात है कि खिलाड़ी एक दूसरे के साथ का पूरा मजा ले रहे हैं और अभ्यास के बीच अच्छा संतुलन भी है ।’’
उन्होंने टीम की ताकत के बारे में पूछने पर कहा कि इस टीम का डिफेंस सफलता की कुंजी हो सकता है ।
उन्होंने कहा ,‘‘ हमारा डिफेंस इतना मजबूत है कि विरोधी टीम को गोल करने के मौके नहीं मिलते । मैं नजर नहीं लगाना चाहता लेकिन हम जिस अनुशासन और टीम कल्चर पर फोकस कर रहे हैं, वही सफलता का आधार है ।’’
मारिन ने अपनी टीम को अति आत्मविश्वास से बचने की भी ताकीद की ।
उन्होंने कहा ,‘‘ विश्व कप में प्रदर्शन से टीम में नया आत्मविश्वास आया है । लेकिन अति आत्मविश्वास भी ठीक नहीं है । मैं उनसे कहता रहता हूं कि इससे बचना है । हमें लगातार मेहनत करनी होगी । एक दूसरे को बेहतर समझना और टीम के रूप में अच्छा खेलना अहम है और यह टीम इसमें अच्छा कर रही है ।’’
कोच ने विश्व कप में टीम और सहयोगी स्टाफ को एकजुटता के लिये ‘कलावा’ और ‘क्रिस्टल बॉल’ दी थी और उन्होंने कहा कि यह एशियाई खेल में भी जारी रहेगा ।
उन्होंने कहा ,‘‘ यह जारी रहेगा । इससे हमें याद रहता है कि हम एक टीम है और एक दूसरे के लिये हमेशा मौजूद हैं ।’’
भाषा
मोना सुधीर
सुधीर

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