सौरभ और मनु ने 10 मीटर पिस्टल में मिश्रित स्पर्धा का स्वर्ण जीता

सौरभ और मनु ने 10 मीटर पिस्टल में मिश्रित स्पर्धा का स्वर्ण जीता

सौरभ और मनु ने 10 मीटर पिस्टल में मिश्रित स्पर्धा का स्वर्ण जीता
Modified Date: November 29, 2022 / 08:18 pm IST
Published Date: March 22, 2021 10:08 am IST

नयी दिल्ली, 22 मार्च (भाषा) सौरभ चौधरी और मनु भाकर की जोड़ी ने आईएसएसएफ विश्व कप निशानेबाजी की 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए सोमवार को यहां स्वर्ण पदक जीता।

भारतीय जोड़ी ने फाइनल में ईरान के गोलनोश सेबहातोलाही और जावेद फोरोगी को 16-12 से हराया। दूसरी सीरीज के बाद 18 वर्षीय चौधरी और 19 वर्षीय भाकर 0-4 से पीछे चल रहे थे लेकिन उसने इसके बाद शानदार वापसी की। भारत का वर्तमान प्रतियोगिता में यह पांचवां स्वर्ण पदक है और वह शीर्ष पर बना हुआ है।

यह इस जोड़ी का विश्व कप की मिश्रित टीम स्पर्धा में पांचवां स्वर्ण पदक है।

ईरानी टीम ने अच्छी शुरुआत की लेकिन एक बार जब भारतीय शुरुआती अड़चनों से पार पाने में सफल रहे तो उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और सोने का तमगा हासिल किया।

भारत की यशस्विनी सिंह देसवाल और अभिषेक वर्मा ने तुर्की के सेवाल इलाइदा तारहान और इस्माइल केलेस को 17-13 से हराकर कांस्य पदक जीता।

खिताब की प्रबल दावेदार चौधरी और भाकर की भारतीय जोड़ी की शुरुआत अच्छी नहीं रही और वह पहली सीरीज में 0-2 से पिछड़ गयी। ईरानी टीम ने दूसरी सीरीज के बाद अपना स्कोर दोगुना कर दिया। इसके बाद चौधरी और भाकर ने वापसी की लेकिन ईरानी टीम ने चार शॉट की बढ़त बनाये रखी।

एक समय स्कोर 6-10 था लेकिन भारतीय जोड़ी ने लगातार तीन सीरीज जीतकर स्कोर 12-10 कर दिया। एक बार बढ़त हासिल करने के बाद भाकर और चौधरी ने ईरानी टीम को वापसी का मौका नहीं दिया और आखिर में चैंपियन बने।

भारतीय जोड़ी क्वालीफाईंग में 384 अंक लेकर दूसरे स्थान पर रही थी।

कांस्य पदक के मुकाबले में देसवाल और वर्मा ने शुरू से दबदबा बनाये रखा और पहली चार सीरीज में 8-0 की बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद तुर्की की टीम ने अच्छी वापसी की और नौ सीरीज के बाद स्कोर 10-8 कर दिया। भारतीय जोड़ी ने हालांकि हार नहीं मानी और आखिर में कांस्य पदक अपने नाम किया।

इससे पहले सुबह इलावेनिल वलारिवान और दिव्यांश सिंह पंवार ने 10 मीटर एयर राइफल मिश्रित टीम स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता था।

भाषा

पंत आनन्द

आनन्द


लेखक के बारे में