नयी दिल्ली, 25 जनवरी (भाषा) भारतीय उपमहाद्वीप में भू-राजनीति ने क्रिकेट को नया स्वरूप देकर उसे अब एक नए मोड़ पर खड़ा कर दिया है।
इस क्षेत्र के क्रिकेट में दशकों तक राजनीतिक व्यवधान को बड़े पैमाने पर भारत-पाकिस्तान मुद्दे के रूप में देखा जाता था। लेकिन अब इसका स्वरूप भी बदल गया है।
राजनीतिक और राजनयिक मुद्दों से उपजे अनसुलझे द्विपक्षीय तनावों के कारण बांग्लादेश को सात फरवरी से शुरू होने वाले टी20 विश्व कप से बाहर कर दिया गया है।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने शनिवार को कहा कि टूर्नामेंट में उनके देश की भागीदारी सरकार की सलाह पर निर्भर करेगी, जिससे यह संकेत मिले कि वह बांग्लादेश के साथ एकजुटता दिखाते हुए टूर्नामेंट से हट सकता है जिससे समस्याएं कुछ समय के लिए और बढ़ गईं।
पूर्व ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह से कहा, ‘‘पाकिस्तान कीचड़ भरे पानी में मछली पकड़ने की कोशिश कर रहा था और दो बनाम एक (पाकिस्तान और बांग्लादेश बनाम भारत) का खेल खेलने की कोशिश कर रहा था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वे पहले से ही श्रीलंका में खेल रहे हैं। यह उससे जुड़ा हुआ मामला नहीं था। जहां जरूरत है वहां दखल क्यों देना। आखिकार नुकसान तो बांग्लादेश क्रिकेट टीम और उसके खिलाड़ियों का ही हो रहा है। विश्व कप में भाग न ले पाने वाले खिलाड़ियों का नुकसान बहुत बड़ा है।’’
पीसीबी ने रविवार को विश्व कप के लिए 15 सदस्यीय टीम की घोषणा की जिससे नक़वी ने जिस खतरे के संकेत दिए थे वह टल गया।
इसके बावजूद अभी तक द्विपक्षीय खेल संबंधों को ही प्रभावित करने वाली राजनीति का दायरा अब फैल रहा है। बांग्लादेश को अभी तक तटस्थ माना जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं है।
इससे यह पता चलता है कि भारतीय उपमहाद्वीप में क्रिकेट अब कूटनीतिक समीकरणों से कितनी गहराई से जुड़ा हुआ है।
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के ढाका से नाटकीय रूप से पलायन और उसके बाद भारत आ जाने के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए।
इसके बाद बांग्लादेश में भारत विरोधी भावनाओं में तेजी आई और कई बांग्लादेशी हिंदुओं की हत्याएं की गईं।
क्रिकेट के लिए तनाव के स्पष्ट संकेत तब सामने आए जब बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्याओं के विरोध में मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल से बाहर कर दिया गया। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने इसे प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया।
उसे यह समझ नहीं आया कि रहमान को लीग से बाहर क्यों किया गया। उसने भारत में सुरक्षा का हवाला देकर विश्व कप के अपने मैचों को श्रीलंका में स्थानांतरित करने की मांग कर दी।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने उसकी इस मांग को खारिज कर दिया। आईसीसी में अभी भारत का दबदबा है।
हरभजन ने कहा कि यह बीसीबी के लिए ‘‘अहं का मामला’’ बन गया, जिसने समाधान खोजने के बजाय आक्रामक रणनीति अपनाकर गलती की।
हरभजन ने कहा, ‘‘भारत आने से सीधे ‘ना’ कहने से पहले उन्हें आईसीसी के साथ बातचीत के लिए रास्ते खुले रखने चाहिए थे।’’
उन्होंने यह भी कहा कि शनिवार को नक़वी को बहिष्कार की धमकी देने का कोई अधिकार नहीं था।
इस ऑफ स्पिनर ने कहा कि विशुद्ध रूप से क्रिकेट के दृष्टिकोण से देखें तो बांग्लादेश की टीम के पास भारतीय पिचों पर अच्छा प्रदर्शन करने का बेहतर मौका था, क्योंकि उनके पास अच्छे स्पिनर हैं।
हरभजन ने कहा, ‘‘अगर टी20 विश्व कप इंग्लैंड या ऑस्ट्रेलिया में खेला जाता, तो उनके जीतने की कोई गुंजाइश ही नहीं थी, लेकिन यहां वे दूसरे दौर तक पहुंच सकते थे और सुपर आठ में कुछ उलटफेर भी कर सकते थे। इसलिए इसमें किसी का नुकसान नहीं है, सिर्फ बांग्लादेश का नुकसान है।’’
भारत और पाकिस्तान अभी आईसीसी के किसी टूर्नामेंट की मेजबानी करने पर एक दूसरे के देश में खेलने के बजाय तटस्थ स्थान पर खेलते हैं।
यह व्यवस्था इसलिए मौजूद है क्योंकि दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंधों को राजनीति ने लगातार प्रभावित किया है। हालांकि इसमें खामियां हैं, फिर भी यह प्रतिस्पर्धा की निष्पक्षता को बनाए रखती है। इसके विपरीत बांग्लादेश को लेकर ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
ऐसी स्थिति में बांग्लादेश अलग-अलग पड़ गया क्योंकि उसके पास कोई वैकल्पिक उपाय, पूर्व उदाहरण या प्रभाव डालने की शक्ति नहीं थी। बांग्लादेश को इससे बड़ा नुकसान हुआ है। इससे उसके खिलाड़ियों को विश्व कप में खेलने का मौका गंवाना पड़ा है और उसे राजस्व का नुकसान भी हुआ है। इससे उसके खिलाड़ियों की लोकप्रियता पर भी असर पड़ेगा।
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पंत नमिता
नमिता