वे चाहते हैं कि मैं खेल छोड़ दूं, प्रतियोगिता में प्रवेश नहीं मिलने पर विनेश ने डब्ल्यूएफआई को घेरा

वे चाहते हैं कि मैं खेल छोड़ दूं, प्रतियोगिता में प्रवेश नहीं मिलने पर विनेश ने डब्ल्यूएफआई को घेरा

वे चाहते हैं कि मैं खेल छोड़ दूं, प्रतियोगिता में प्रवेश नहीं मिलने पर विनेश ने डब्ल्यूएफआई को घेरा
Modified Date: May 11, 2026 / 08:14 pm IST
Published Date: May 11, 2026 8:14 pm IST

(अमनप्रीत सिंह)

गोंडा, 11 मई (भाषा) विनेश फोगाट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के बाद राष्ट्रीय ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में हिस्सा लेने की कोशिश की जिसे महासंघ ने सोमवार को साफ तौर पर खारिज कर दिया। इससे एक नया और नाटकीय टकराव शुरू हो गया जिसमें इस मशहूर पहलवान ने इसे अपनी वापसी रोकने की ‘पहले से रची गई साजिश’ बताया।

विनेश आयोजन स्थल पर पहुंची और दावा किया कि वह प्रतियोगिता में लौटने के लिए योग्य हैं जबकि महासंघ ने उन्हें 26 जून 2026 तक अयोग्य घोषित कर रखा था। महासंघ ने यह फैसला डोपिंग रोधी नियमों के तहत संन्यास से लौटने वाले खिलाड़ियों के लिए अनिवार्य छह महीने के नोटिस समय के कारण लिया था लेकिन डब्ल्यूएफआई ने उनके दस्तावेज स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

विनेश ने डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष संजय सिंह से मिलने के बाद पत्रकारों से कहा ,‘‘ आप आखिर मुझसे क्या चाहते हैं । क्या मैं संन्यास लेकर परे हो जाऊं । हार मान लूं । ताकि मेरे खिलाफ उनकी साजिश कामयाब हो जाये ।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वे मुझे इजाजत नहीं दे रहे हैं। वे चाहते हैं कि मेरा करियर खत्म हो जाए और मैं संन्यास ले लूं। मैं तो बस मुकाबला करने का एक सही मौका मांग रही हूं लेकिन वे इस बात पर अड़े हैं कि पहले मैं उनके नोटिस का जवाब दूं। यह सब एक साजिश है।’’

विनेश ने कहा कि उन्होंने नाडा या वाडा के किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है और डोप परीक्षण में भी वे पूरी तरह से पाक-साफ पाई गई हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर मैंने किसी नियम का उल्लंघन किया होता तो नाडा या वाडा मुझे कारण बताओ नोटिस भेजते या मुझ पर प्रतिबंध लगा देते। इसके बाद भी मैंने डोप परीक्षण करवाए और उनमें भी मैं पाक-साफ निकली। खेलों में मेरा रिकॉर्ड हमेशा से साफ-सुथरा रहा है। आईटीए ने मुझे बताया था कि मैं एक जनवरी, 2026 से मुकाबले में हिस्सा लेने के लिए पात्र हूं।’’

इस पहलवान ने कहा, ‘‘वे सीधे-सीधे कह सकते हैं कि वे नहीं चाहते कि मैं खेलूं या मैट पर उतरूं। इसके बजाय वे मुझे इतना परेशान कर रहे हैं कि मैं थक-हारकर खुद ही खेल छोड़ दूं।’’

इस ‘कारण बताओ नोटिस’ को एक ‘पहले से रची गई साजिश’ बताते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इसका समय जानबूझकर ऐसा चुना गया है ताकि टूर्नामेंट से पहले उनके पास कानूनी मदद लेने के बहुत कम रास्ते बचें।

विनेश ने कहा, ‘‘मुझे शुक्रवार की रात को नोटिस मिला। शनिवार को मैं अपना वजन कम करने और कागजी कार्रवाई निपटाने में लगी थी। उन्हें ठीक-ठीक पता था कि नोटिस कब भेजना है, जब अदालतें बंद होंगी और जब कागजात जमा करना मुश्किल हो जाएगा। यह सब पहले से तय था।’’

डब्ल्यूएफआई ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि जब तक एक पैनल द्वारा की जा रही अनुशासनात्मक कार्रवाई पूरी नहीं हो जाती तब तक वह इस प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकतीं।

जब पीटीआई ने संजय सिंह से पूछा कि उन्होंने यह ‘कारण बताओ नोटिस’ अभी क्यों जारी किया है तो उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने अभी हाल ही में बताया था कि वे गोंडा में होने वाली प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का मन बना रही हैं। उससे पहले हमें पता ही नहीं था कि वे कब वापसी करने वाली हैं। जब उन्होंने अपना पंजीकरण करवाया तभी वह डब्ल्यूएफआई के दायरे में आईं। इसलिए हमने उसी के हिसाब से कार्रवाई की।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जब मैंने उनसे पूछा कि उन्होंने दो अलग-अलग वजन वर्गों में मुकाबला क्यों किया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने इसका सारा दोष तदर्थ पैनल पर डाल दिया। जब वे अपना जवाब दे देंगी और अगर उनका जवाब संतोषजनक हुआ तो हम अपने अगले कदम के बारे में सोचेंगे।’’

विनेश ने कहा कि उन्होंने 12 दिसंबर को ही डब्ल्यूएफआई को बता दिया था कि वह खेल में वापसी करना चाहती हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे कारण बताओ नोटिस देने के लिए आपको छह महीने तक इंतजार क्यों करना पड़ा जबकि प्रतियोगिता में सिर्फ दो दिन बचे थे?’’

फिर भी उन्होंने शुरू में एक छोटा सा जवाब दिया और तय 14 दिन के अंदर विस्तृत जवाब देंगी। सोमवार को प्रतियोगिता से पहले जैसे ही महिलाओं के लिए सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई विनेश अपने पति के साथ आईं लेकिन उनके दस्तावेज नहीं लिए गए।

दो बार की विश्व चैंपियनशिप की पदक विजेता पूर्व डब्ल्यूएफआई प्रमुख बृज भूषण शरण सिंह और उनके साथियों के खिलाफ पहलवानों के लंबे विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें ‘राष्ट्र विरोधी’ कहे जाने पर भी गुस्सा जाहिर किया।

विनेश ने कहा, ‘‘मैंने देश का प्रतिनिधित्व किया है। मैं ओलंपिक में गई हूं, मैंने राष्ट्रमंडल खेलों में खेला है, मैंने विश्व स्तर पर खेला है। आप मुझे ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ कह रहे हैं। शायद कल वे मुझे आतंकवादी या खालिस्तानी कहेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस देश की एक सम्मानित नागरिक हूं। मुझे बोलने का अधिकार है और मैं देश के किसी भी हिस्से में जा सकती हूं। संजय सिंह ने मुझे ये अधिकार नहीं दिए हैं।’’

मीडिया से बातचीत खत्म होने के बाद सबसे नाटकीय दृश्य सामने आए। सोमवार शाम पांच से सात बजे के बीच होने वाले महिलाओं के वजन से पहले ट्रेनिंग के लिए जगह ढूंढ़ते हुए विनेश ने आयोजन स्थल के अंदर ‘वार्म-अप’ का स्थान ढूंढ़ा लेकिन वह बंद मिला।

उन्होंने कहा, ‘‘अब ट्रेनिंग भी नहीं कर सकती क्या? ताला तो खुलवा दो कम से कम।’’

फिर वह इस उम्मीद में भारतीय खेल प्राधिरण (साइ) के केंद्र गईं कि उन्हें ट्रेनिंग के लिए मैट मिल जाएंगे लेकिन वहां भी कोई मैट उपलब्ध नहीं था। उन्होंने पास में तैनात एक पुलिस अधिकारी से सुविधा खुलवाने में मदद करने का अनुरोध किया लेकिन उन्होंने विनम्रता से जवाब दिया कि उनकी जिम्मेदारी सिर्फ सुरक्षा देना है और इस जगह पर उनका कोई अधिकार नहीं है।

विनेश ने आयोजन स्थल से निकलते हुए कहा, ‘‘हम हर तरह से कोशिश कर रहे हैं लेकिन वे मुझे कुश्ती नहीं लड़ने दे रहे हैं। मैं पूरी ईमानदारी और सच्चाई से कड़ी मेहनत कर रही हूं। भगवान जानता है कि मैं बेदाग हूं। अगर मैं सही हूं तो वह मुझे हिम्मत देगा। हम अपने अधिकारों के लिए लड़ेंगे।’’

महासंघ ने विनेश से कई आरोपों पर स्पष्टीकरण मांगा है जिनमें वजन अधिक होने के कारण 2024 पेरिस खेलों से उनका बाहर होना, डोपिंग रोधी नियमों के तहत कथित तौर पर अपनी मौजूदगी की जानकारी नहीं देना और मार्च 2024 में तत्कालीन भारतीय ओलंपिक संघ द्वारा नियुक्त तदर्थ पैनल द्वारा आयोजित चयन ट्रायल्स के दौरान दो अलग-अलग वजन श्रेणियों में मुकाबला करना शामिल है।

रैंकिंग टूर्नामेंट में महिलाओं की प्रतियोगिता मंगलवार को होनी है। इस प्रतियोगिता में पदक जीतने वालों को इस साल के आखिर में होने वाले विश्व चैंपियनशिप ट्रायल्स में हिस्सा लेने का मौका मिल सकता है लेकिन डब्ल्यूएफआई की नीति के अनुसार उन्हें एशियाई खेलों में ट्रायल्स में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं होगी।

भाषा सुधीर आनन्द

आनन्द


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