(अमनप्रीत सिंह)
नयी दिल्ली, 23 अगस्त (भाषा) भारत की शीर्ष महिला एकल टेनिस खिलाड़ी सहजा यमलापल्ली, वैष्णवी अडकर और वैदेही चौधरी को एशियाई खेलों की टेनिस टीम से बाहर कर दिया गया है। सरकार द्वारा खिलाड़ियों की सूची में कटौती किए जाने के बाद भारत की शीर्ष महिला एकल खिलाड़ी टीम में जगह नहीं बना सकीं और इस अवसर से वंचित किए जाने से सहजा ‘बहुत हैरान’ हैं।
सरकार की ओर से 22 अगस्त को जारी अंतिम मंजूरी आदेश में आइची-नागोया एशियाई खेलों के लिए 35 खेलों में 492 खिलाड़ियों को मंजूरी दी गई है लेकिन अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) की टेनिस के लिए चुने गए सभी खिलाड़ियों को शामिल करने की मांग स्वीकार नहीं की गई।
एआईटीए ने मूल रूप से 12 सदस्यीय टेनिस टीम का प्रस्ताव भेजा था जिसमें छह महिला खिलाड़ी शामिल थीं लेकिन अंतिम सूची में खिलाड़ियों की संख्या घटाकर सात कर दी गई। महिला खिलाड़ियों में केवल अंकिता रैना और रुतुजा भोसले को जगह मिली है।
प्रार्थना थोम्बारे और पुरुष एकल के उभरते खिलाड़ी मानस धामने को भी टीम से बाहर रखा गया है। एशियाई खेल 19 सितंबर से चार अक्टूबर तक आइची-नागोया में होने हैं।
सहजा भारत की नंबर एक महिला एकल खिलाड़ी हैं और डब्ल्यूटीए रैंकिंग में 344वें स्थान पर हैं। उनके बाद वैष्णवी 390वें और वैदेही 437वें स्थान पर हैं।
नीदरलैंड में डब्ल्यूटीए प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहीं सहजा ने पीटीआई से कहा, ‘‘यह सुनकर मैं बेहद हैरान और निराश हूं। मैं एशियाई खेलों में हिस्सा लेने को लेकर काफी उत्साहित थी।’’
सहजा ने कहा कि यह निराशाजनक है क्योंकि बड़ी बहु खेल प्रतियोगिताओं में निचली रैंकिंग वाले खिलाड़ियों के ऊंची रैंकिंग वाले खिलाड़ियों को हराने के कई उदाहरण हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे कई उदाहरण हैं जब कमजोर माने जाने वाले खिलाड़ियों ने शीर्ष खिलाड़ियों को हराकर पदक और टूर्नामेंट जीते हैं क्योंकि वहां परिस्थितियां अलग होती हैं। कौन जानता है, शायद यह फैसला सही नहीं है।’’
सहजा ने कहा, ‘‘अगर हम यह कहें कि मैं तभी खेलूंगी जब मैं वरीयता प्राप्त खिलाड़ी हूं तो फिर वहां जाने का क्या मतलब है? आखिर टेनिस खेलने का मतलब ही क्या है?’’
एआईटीए ने तीन जुलाई को भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) से सहजा को टीम में शामिल करने का विशेष रूप से समर्थन किया था। एआईटीए ने उनके भारत की सर्वोच्च रैंकिंग वाली महिला एकल खिलाड़ी होने और आईटीएफ तथा डब्ल्यूटीए प्रतियोगिताओं में ऊंची रैंकिंग वाले खिलाड़ियों के खिलाफ उनके हालिया अच्छे प्रदर्शन का भी उल्लेख किया था।
एआईटीए ने वैष्णवी के एफआईएसयू विश्व विश्वविद्यालय खेलों में कांस्य पदक और वैदेही के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छे प्रदर्शन का भी हवाला दिया था।
सहजा ने कहा कि खिलाड़ियों को अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रशासकों के समर्थन और भरोसे की जरूरत होती है।
उन्होंने कहा, ‘‘खिलाड़ियों पर भरोसा रखिए क्योंकि हमें खुद पर भरोसा है। ग्रैंड स्लैम में भी क्वालीफायर खिलाड़ी आगे तक पहुंच रहे हैं और इतिहास रच रहे हैं। यही तो खेल का मजा है।’’
इन तीनों महिला एकल खिलाड़ियों के बाहर होने से एशियाई खेलों में इस वर्ग में भारत का संभवत: कोई प्रतिनिधित्व नहीं हो। अगर अंकिता को बाद में एकल में उतारा भी जाता है तो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के मुख्य दौर में जगह बनाने में उनके हालिया संघर्ष को देखते हुए भारत की पदक की उम्मीदें सीमित रह सकती हैं।
एआईटीए के अंतरिम महासचिव सुंदर अय्यर ने पीटीआई से कहा, ‘‘हमने सभी चयनित खिलाड़ियों को भेजने के लिए अधिकारियों को समझाने की पूरी कोशिश की लेकिन वे एशिया के केवल शीर्ष आठ खिलाड़ियों को भेजने के मानदंड का हवाला दे रहे हैं। यह निराशाजनक है लेकिन सभी खेलों के लिए मानदंड समान हैं।’’
एआईटीए ने अपनी सबसे मजबूत टीम भेजने के पक्ष में व्यापक तर्क दिया था। संघ का कहना था कि एशियाई खेलों में टेनिस में पांच अलग-अलग पदक स्पर्धाएं होती हैं और एकल, युगल तथा मिश्रित युगल की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखकर चयन किया जाना चाहिए।
एआईटीए ने भारत की मिश्रित युगल में मजबूत संभावनाओं का भी उल्लेख किया था। उसने बताया था कि शीर्ष आठ स्वीकृत जोड़ियों में भारत की तीन जोड़ियां शामिल हैं और भारत को दो जोड़ियां उतारने का अधिकार है।
इसी आधार पर एआईटीए ने अंकिता और प्रार्थना को शामिल करने की मांग की थी। अंकिता ने 2018 एशियाई खेलों में महिला युगल का कांस्य पदक जीता था और 2022 के हांगझोउ एशियाई खेलों में एकल तथा मिश्रित युगल में क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थीं।
एआईटीए ने भारतीय ओलंपिक संघ से खिलाड़ियों को बाहर किए जाने के फैसले की तत्काल समीक्षा करने और स्पर्धा की जरूरतों के आधार पर प्रविष्टियों का दोबारा आकलन करने का अनुरोध किया था।
पुरुष टीम में भारत के दो एकल खिलाड़ी सुमित नागल और दक्षिणेश्वर सुरेश हैं जबकि युकी भांबरी, एन श्रीराम बालाजी और अनिरुद्ध चंद्रशेखर युगल टीम का हिस्सा हैं।
महिला टीम में अंकिता और ऋतुजा की युगल जोड़ी को जगह मिली है।
भाषा सुधीर नमिता
नमिता