नॉर्वे की 28 साल बाद विश्व कप में वापसी के उत्साह में ‘वाइकिंग’ की झलक
नॉर्वे की 28 साल बाद विश्व कप में वापसी के उत्साह में ‘वाइकिंग’ की झलक
… अजय मसंद …
ओस्लो, आठ जून (भाषा) नॉर्वे एक ऐसा देश है जहां लोग अपनी भावनाओं पर काबू रखने के लिए जाने जाते है। ऐसे में फुटबॉल विश्व कप में हिस्सा लेने के लिए तैयार टीम की हालिया ‘वाइकिंग-थीम (मध्यकालीन समुद्री योद्धाओं और नाविकों की तरह)’ वाला फोटोशूट असाधारण रूप से साहसिक प्रतीत हुआ। उल्लेवाल स्टेडियम में स्कैंडिनेवियाई डर्बी में स्वीडन को 3-1 से हराने के तीन दिन बाद नॉर्वे की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने जर्सी की जगह कवच, ढाल और तलवारें पहन लीं। देश के प्रसिद्ध फ़्योर्ड (पहाड़ों के बीच समुद्र का बहुत गहरा और संकरा प्रवेश मार्ग) में से एक के किनारे एकांत समुद्र तट पर खिलाड़ियों ने पहाड़ों और समुद्र की पृष्ठभूमि में पारंपरिक लंबी नावों के साथ आधुनिक वाइकिंग के रूप में पोज दिया। ये तस्वीरें देखते ही देखते दुनिया भर में वायरल हो गईं लेकिन नॉर्वे के लिए यह केवल एक प्रचार अभियान नहीं था, बल्कि उस धैर्य और संघर्ष का प्रतीक था, जिसने टीम को 28 वर्षों बाद विश्व कप तक पहुंचाया। नॉर्वे ने 1998 के बाद से विश्व कप में भाग नहीं लिया है। इस दौरान मार्टिन ओडेगार्ड और एर्लिंग हॉलैंड जैसे विश्वस्तरीय खिलाड़ी उभरे, लेकिन टीम बार-बार क्वालीफिकेशन से चूकती रही। वाइकिंग थीम ने न केवल इस लंबे इंतज़ार को दर्शाया, बल्कि नॉर्वे की उस सांस्कृतिक पहचान को भी सामने रखा, जिसमें साहस और धैर्य की भावना गहराई से जुड़ी है। राजधानी ओस्लो में इस समय भी सामान्य जीवन की शांत गति बनी हुई है। यहां फुटबॉल को लेकर उत्साह अक्सर खुलकर नहीं दिखाई देता। लोग अपने कामकाज और दैनिक दिनचर्या में व्यस्त रहते हैं। लेकिन मैचों के दौरान यह स्थिति बदल जाती है, जैसा कि हाल ही में स्वीडन के खिलाफ मुकाबले में वाइकिंग नौका जैसी सामूहिक जश्न की झलक में देखा गया। कई देशों में फुटबॉल राष्ट्रीय चर्चाओं पर हावी होता है, वहीं नॉर्वे की खेल-संस्कृति संतुलित है। यह फुटबॉल, स्कीइंग, शीतकालीन खेल, एथलेटिक्स और बाहरी गतिविधियों में बांटी हुई है। फुटबॉल यहां अहम खेल है लेकिन ऐसे नहीं है कि इसकी दीवानगी लोंगों के सिर चढ़कर बोले। ओस्लोफ्जोर्ड के किनारे हाथ से बनी ‘नॉर्डिक’ ऊनी टोपी बेचने वाली लिसा ने माना कि शायद उन्हें नॉर्वे की राष्ट्रीयता से जुड़ी और अधिक चीजें रखनी चाहिये। उन्होंने कहा, ‘‘हां, मुझे नॉर्वे के झंडे वाली टोपी बनानी चाहिए थी । लोग विश्व कप को लेकर बहुत उत्साहित हैं, लेकिन शायद यहां खुलकर नहीं दिखाते। जब नॉर्वे ने स्वीडन से खेला, तो हजारों प्रशंसक फुटबॉल कैप और जर्सी के साथ मौजूद थे।’’ किशोर सेबस्टियन और फिलिप भी टीम की संभावनाओं को लेकर आशावादी थे। सेबस्टियन ने कहा, ‘‘ हमारी टीम मजबूत है। हमारे पास हॉलैंड और ओडेगार्ड हैं, और लगभग आधी युवा आबादी फुटबॉल का अनुसरण करती है।’’ जब पूछा गया कि शहर में इतने कम लोग जर्सी क्यों पहनते हैं, तो उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं पता।’’ ओस्लो के एक होटल में काम करने वाले दक्षिण एशियाई शेफ ने सबसे रोचक दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा, ‘‘यहां फुटबॉल संस्कृति है, लेकिन हमारे देशों जैसी दीवानगी नहीं है क्योंकि लोग काम और स्कूल में व्यस्त रहते हैं। जब मैच होता है, तो यहां लोग बहुत उत्साहित होते हैं। मैच के दिन वे पागलपन दिखाते हैं’’ कोच स्टाले सोलबक्केन के नेतृत्व में टीम 16 जून को इराक के खिलाफ अपने विश्व कप अभियान की शुरुआत करेगी। हॉलैंड, ओडेगार्ड और प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों की मौजूदगी में यह टीम नॉर्वे के लिए नई उम्मीदें लेकर आई है। ओस्लो फिलहाल शांत है, लेकिन जैसे ही विश्व कप का आगाज होगा, इस शांत माहौल के बदलने की पूरी संभावना है। भाषा आनन्द सुधीरसुधीर

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