जब दक्षिण अफ्रीकी महिला हॉकी टीम की विश्व कप में खेलने की गुहार मंत्रालय ने सुनी

जब दक्षिण अफ्रीकी महिला हॉकी टीम की विश्व कप में खेलने की गुहार मंत्रालय ने सुनी

जब दक्षिण अफ्रीकी महिला हॉकी टीम की विश्व कप में खेलने की गुहार मंत्रालय ने सुनी
Modified Date: August 17, 2026 / 06:47 pm IST
Published Date: August 17, 2026 6:47 pm IST

(मोना पार्थसारथी)

एम्सटेलवीन, 17 अगस्त (भाषा) दक्षिण अफ्रीकी हॉकी खिलाड़ी ओनथातिले थाती जुलु ने जब विश्व कप से पहले सोशल मीडिया पर लिखा कि टीम को अपने विश्व कप के सपने को पूरा करने के लिए अपनी जेब से पैसे जुटाने पड़ रहे हैं तो यह शिकायत से अधिक एक गुहार थी।

और सत्ता के गलियारों तक उनकी आवाज पहुंची।

जुलु ने लिखा, ‘‘मैं लंबे समय से शांत रही हूं लेकिन विश्व कप की तैयारी के दौरान मुझे लगा कि अपनी टीम और हर युवा दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी के प्रति मेरी जिम्मेदारी है।’’

उन्होंने बताया कि धन की कमी और सीमित तैयारी के कारण राष्ट्रीय महिला टीम का टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए वहां तक पहुंचना भी मुश्किल हो रहा था।

उनकी भावुक अपील ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा और अंततः दक्षिण अफ्रीकी खेल मंत्रालय ने टीम को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई। इससे टीम को यूरोप में तैयारी करने और विश्व कप से पहले स्कॉटलैंड तथा वेल्स के खिलाफ मैच खेलने का मौका मिला।

जुलु का अपनी बात रखना अपनी साथी खिलाड़ियों की मदद करने और यह सुनिश्चित करने के बारे में था कि आर्थिक चिंताएं उनके विश्व कप के सपने पर हावी नहीं हों।

जुलु ने पीटीआई से कहा, ‘‘मैं हॉकी और अपनी टीम को लेकर बहुत जुनूनी हूं और मैं उन सभी बाहरी समस्याओं को दूर करना चाहती थी जो विश्व कप की हमारी तैयारियों को प्रभावित कर सकती थीं। इनमें से एक समस्या इस विश्व कप में आने का खर्च उठाना भी थी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सौभाग्य से मैं दिल से निकली बात लिखने में सफल रही और सोशल मीडिया पर इसे काफी ध्यान मिला। इसके बाद खेल मंत्री ने हमें यहां पहुंचने के लिए कुछ धनराशि उपलब्ध कराई।’’

यह सहायता उस टीम के लिए बड़ी राहत साबित हुई जिसे नियमित शिविरों, स्थायी प्रशिक्षण केंद्र या दुनिया की शीर्ष टीमों के खिलाफ लगातार खेलने के अवसरों के अभाव में लंबे समय से सीमित संसाधनों में ही काम चलाना पड़ता है।

जुलु ने कहा, ‘‘हम किसी केंद्रीकृत कार्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं और हॉकी हमारा पेशा नहीं है। ज्यादातर खिलाड़ी अपने सपनों को पूरा करने के साथ पढ़ाई या नौकरी भी करती हैं। लेकिन हम कोई बहाना नहीं बना रहे हैं। यह हमारा जुनून है और हमें खेलना पसंद है।’’

मंत्रालय की मदद से दक्षिण अफ्रीका को यूरोप में जरूरी अनुभव हासिल करने का भी मौका मिला जो उसे नियमित रूप से नहीं मिल पाता क्योंकि वह प्रो लीग का हिस्सा नहीं है।

जुलु ने कहा, ‘‘हम विश्व कप से पहले यूरोप में कुछ अभ्यास मैच खेलना चाहते थे और उस धनराशि की मदद से हमें टूर्नामेंट से पहले स्कॉटलैंड और वेल्स के खिलाफ खेलने का मौका मिला। अब हम आम तौर पर जितनी तैयारी करते हैं, उससे बेहतर स्थिति में हैं।’’

हालांकि टीम के सामने का आर्थिक संकट सिर्फ एक विश्व कप तक सीमित नहीं है।

स्थानीय टूर्नामेंटों में हिस्सा लेने के लिए भी खिलाड़ियों को कई बार अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ते हैं। कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी आर्थिक दिक्कतों के कारण अंततः हॉकी छोड़ चुके हैं।

जुलु ने कहा, ‘‘हमने आर्थिक तंगी के कारण कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को खो दिया है। मैं इस मुद्दे पर आवाज उठाती रहूंगी क्योंकि मुझे इस खेल से बहुत प्यार है।’’

दक्षिण अफ्रीका में स्कूलों और विश्वविद्यालयों से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की नई पौध सामने आ रही है लेकिन केंद्रीकृत कार्यक्रम या स्थायी करियर के विकल्प के अभाव में उन्हें खेल में बनाए रखना चुनौती बना हुआ है।

जुलु ने कहा, ‘‘कई प्रतिभाशाली युवा हॉकी खेल रहे हैं। हमारे पास कोई केंद्रीकृत कार्यक्रम या नौकरी नहीं होने के कारण यह व्यवस्था स्थायी नहीं है। हालांकि स्कूलों और विश्वविद्यालयों में कई खिलाड़ी हॉकी खेलते हैं और हमें उन्हें कुछ और समय तक खेल से जोड़े रखने के तरीके तलाशने होंगे।’’

कप्तान एडिथ मोलिकोए ने भी इन मुश्किलों को करीब से अनुभव किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम दूसरे देशों की तरह भाग्यशाली नहीं हैं कि हमारे नियमित शिविर लगते हों। हमारे पास वित्तीय संसाधन या कोई स्थायी केंद्र नहीं है जहां हम एक टीम के रूप में प्रशिक्षण ले सकें। यह काफी मुश्किल रहा है।’’

मोलिकोए ने विश्व कप की तैयारियों के लिए धन हासिल करने में जुलु की सोशल मीडिया अपील को अहम बताया।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरी साथी खिलाड़ी जुलु की सोशल मीडिया पर अपील के बाद हमें विश्व कप की तैयारी के लिए कुछ धन मिला, जो एक शानदार पहल थी।’’

कप्तान का मानना है कि दक्षिण अफ्रीका के पास प्रतिस्पर्धा करने की प्रतिभा है, लेकिन खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का वास्तविक रास्ता देने के लिए अधिक वित्तीय सहायता, बेहतर सुविधाएं, नियमित अंतरराष्ट्रीय अनुभव और स्थायी प्रशिक्षण केंद्र की जरूरत है।

मोलिकोए ने कहा, ‘‘दक्षिण अफ्रीका में प्रतिभाओं का बड़ा पूल है। अधिक वित्तीय सहायता, सुविधाएं, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और प्रशिक्षण केंद्र निश्चित रूप से उभरते खिलाड़ियों की मदद करेंगे।’’

जुलु के लिए यह मुद्दा ऐसे देश में हॉकी को जीवित रखने से भी जुड़ा है जहां रग्बी और क्रिकेट को अधिक लोकप्रियता, ध्यान और प्रायोजन मिलता है।

उन्होंने कहा, ‘‘लड़कों के साथ भी यही स्थिति है क्योंकि रग्बी और क्रिकेट लोकप्रिय खेल हैं और उन्हें अधिक ध्यान तथा प्रायोजन मिलता है।’’

इसके बावजूद नौकरी या पढ़ाई करने, खेल में आर्थिक योगदान देने और कई तरह के त्याग करने के बाद भी ये खिलाड़ी अपने पसंदीदा खेल के लिए मैदान पर उतरती रहती हैं।

जुलु ने कहा, ‘‘हम अपने खेल को जीवित रखने की कोशिश कर रहे हैं और मैं ऐसा करती रहूंगी।’’

दक्षिण अफ्रीकी महिला टीम मंगलवार को भारत के खिलाफ खेलेगी।

भाषा मोना सुधीर आनन्द

आनन्द


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