दो दिन के भीतर निराशा को खुशी में बदला सुरूचि और कमलजीत ने

दो दिन के भीतर निराशा को खुशी में बदला सुरूचि और कमलजीत ने

दो दिन के भीतर निराशा को खुशी में बदला सुरूचि और कमलजीत ने
Modified Date: September 25, 2026 / 06:41 pm IST
Published Date: September 25, 2026 6:41 pm IST

(अजय मसंद)

नागोया, 25 सितंबर (भाषा) सुरूचि इंदर सिंह और कमलजीत ने एशियाई खेलों में घोर निराशा से सुनहरी खुशी तक का सफर 48 घंटे में तय किया और दो स्पर्धाओं में नाकामी के बाद एशियाई खेलों में शुक्रवार को भारत को निशानेबाजी का पहला स्वर्ण पदक दिलाया ।

दोनों कल रात तक एशियाई खेलों में नाकामी को लेकर दुखी थे । सुरूचि महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल में व्यक्तिगत और टीम वर्ग में पदक से चूक गई थी । वहीं कमलजीत पुरूष वर्ग में फाइनल में प्रवेश नहीं कर पाये थे ।

सुरूचि ने कमलजीत के साथ मिश्रित टीम स्पर्धा का स्वर्ण जीतने के बाद कहा ,‘‘ महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल में हमारा दिन नहीं था और हम व्यक्तिगत तथा टीम स्पर्धा में पदक से चूक गए । लेकिन आज हमारा दिन था, भारत का दिन था ।’’

उन्होंने कहा ,‘‘ मैने बुधवार को मैच के बाद पूरे दिन आराम किया । मैने उस नतीजे को अपने जेहन से पूरी तरह से निकाल दिया ।’’

वह अपने कमरे में गई और रात को सोने के बाद सुबह नयी शुरूआत के इरादे से उठी । कोच समरेश जंग ने उनकी मदद की ।

सुरूचि ने कहा ,‘‘ उन्होंने कहा कि चिंता मत करो, यह तुम्हारे हाथ में नहीं था लेकिन खुद को साबित करने का एक और मौका तुम्हारे पास है ।’’

वहीं कमलजीत के लिये एक फोन कॉल ने सब कुछ बदल दिया ।

उन्होंने कहा ,‘‘ समरेश सर ने कहा कि 10 मीटर मिश्रित टीम में केदारलिंग की जगह मैं खेलूंगा । मुझे लगा कि यह भगवान का भेजा संदेश है जिससे मुझे एक मौका और मिल रहा है । मेरे पास नयी जोड़ीदार के साथ तैयारी के लिये समय नहीं था लेकिन मैं तैयार था ।’’

दोनों हरियाणा के होने से भी तालमेल में मदद मिली । सुरूचि झज्जर से है और कमलजीत रेवाड़ी से ।

भाषा

मोना नमिता

नमिता


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