ओलंपिक में जगह बनाने की कोशिश में जुटा योगासन

ओलंपिक में जगह बनाने की कोशिश में जुटा योगासन

ओलंपिक में जगह बनाने की कोशिश में जुटा योगासन
Modified Date: May 28, 2026 / 03:14 pm IST
Published Date: May 28, 2026 3:14 pm IST

नयी दिल्ली, 28 मई (भाषा) मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए प्राचीन भारतीय अभ्यास ‘योग’ को सदियों से आध्यात्मिक गुरुओं द्वारा प्रचारित किया जाता रहा है, लेकिन अब यह अगले एक दशक में एक आकर्षक वैश्विक खेल ‘योगासन’ बनने की उम्मीद कर रहा है।

इस बड़ी योजना में 2036 के ओलंपिक में इसे पदक जीतने वाला खेल बनाने लायक करना शामिल है क्योंकि भारत अहमदाबाद में इन खेलों की मेजबानी की उम्मीद का सपना संजोए है।

जहां ओलंपिक का आदर्श नारा है ‘तेज, ऊंचा और मजबूत’ ‘योग’ इस आंदोलन में थोड़ा ‘ठहराव और संतुलन’ जोड़ने की उम्मीद लगाए है।

विश्व योगासन के उपाध्यक्ष उदित शेठ ने पीटीआई से कहा, ‘‘ हम यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि 2036 में योगासन एक पदक दिलाने वाला खेल बन जाए, भले ही ओलंपिक खेलों का आयोजन टिम्बकटू में ही क्यों नहीं हो। ’’

उन्होंने मजाक में माली के पांचवीं सदी के शहर ‘टिम्बकटू’ का जिक्र किया जो एक ‘यूनेस्को विश्व हेरिटेज साइट’ भी है।

योगासन की एक खेल के तौर पर वैश्विक पहचान धीरे धीरे बढ़ रही है और इसे इस साल के एशियाई खेलों में ‘प्रदर्शनी खेल’ के तौर शामिल किया गया है।

शेठ ने कहा कि 2032 ओलंपिक में इसका ‘प्रदर्शनी खेल’ के तौर पर शामिल कराना अगला लक्ष्य है।

इस खेल के हितधारकों में भारत सरकार भी शामिल है और अहमदाबाद में चार से आठ जून तक 75 देशों की पहली योगासन विश्व चैंपियनशिप के साथ इसकी रफ्तार में तेजी आने की उम्मीद कर रहे हैं।

भारत को 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी मिल चुकी है जिसमें योगासन को दो देसी स्पर्धाओं में से एक के तौर पर प्रस्तावित किया जा चुका है।

योगासन के पास अभी 40 संबंद्ध संस्थाएं हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति से मान्यता पर विचार करने के लिए कम से कम तीन महाद्वीप से न्यूनतम 50 संबंद्ध संस्थाएं होना जरूरी है लेकिन शेठ उम्मीदों को लेकर उत्साहित हैं।

भाषा नमिता मोना

मोना


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