बाईक पर बेटी का शव, नया भारत गढ़ती शर्मनाक व्यस्थाएं !

बाईक पर बेटी का शव, नया भारत गढ़ती शर्मनाक व्यस्थाएं !

बाईक पर बेटी का शव, नया भारत गढ़ती शर्मनाक व्यस्थाएं !
Modified Date: November 29, 2022 / 08:52 pm IST
Published Date: May 24, 2017 4:28 pm IST

बुढ़ार जनपद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चन्नौड़ी निवासी महेश यादव मंगलवार को अपनी 5 वर्षीय पुत्री प्रीति यादव का शव अपने एक रिश्तेदार के साथ मोटर साईकल में लेकर घर जा रहा था, तभी उस पर मीडिया की नजर पड़ गई। उसे रोककर जब बाईक में शव ले जाने के बारे में उससे पूछा गया तब उसने अपनी दर्द भरी व्यथा सुनाई, जिसने मानवीयता का दंभ भरने वाले शासन-प्रशासन के नुमाइंदों और समाज के ठेकेदारों की पोल खोलकर रख दी। जिला अस्पताल में थी भर्ती पीडित पिता महेश यादव ने बताया कि उसकी बच्ची प्रीति पिछले कुछ दिनों से बीमार थी। जिसे उसने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बुढ़ार में उपचार हेतु भर्ती कराया, बुढ़ार के डॉक्टरों ने प्रीति का इलाज किया, लेकिन उसके स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ, तब डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल शहडोल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में भर्ती कराये जाने के कुछ समय बाद ही प्रीति के सांसों की डोर टूट गई और परिजन रोते-बिलखते रह गये।

पीडित ने बताया कि जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में दम तोड़ चुकी प्रीति के शव को गृह ग्राम ले जाने के बारे में परिजन सोच ही रहे थे और शव वाहन की व्यवस्था करने में जुटे थे, इसी दौरान अस्पताल के कर्मचारियों ने जबरन प्रीति के शव को बाहर निकलवा दिया गया। पीडित परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से शव वाहन उपलब्ध कराये जाने का आग्रह किया, तो उन्हें यह कहते हुए मना कर दिया गया कि शव वाहन नहीं है। 

दलालों ने कसा शिकंजा बेटी के शव को चन्नौड़ी ले जाने के लिए शव वाहन की तलाश में दर-दर भटक रहे परिजनों को दो-तीन घंटे मशक्कत के बाद भी वाहन नहीं मिल पाया। इसी दौरान अस्पताल में दिन-रात घूमने वाले कतिपय दलालों ने उन्हें शव वाहन दिलाने का भरोसा दिलाया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि कम से कम 2500 रूपये लगेंगे। बेटी के इलाज में अपनी जमा पूंजी गवां चुके पिता ने रूपये दे पाने में असमर्थता जताई तो दलालों ने भी हाथ खींच लिया। 

बाईक पर ले गया शव तमाम प्रयासों के बाद भी शव वाहन की व्यवस्था न होने पर महेश यादव अपनी बेटी प्रीति का शव अपने एक रिश्तेदार के साथ मोटरसाईकल में लेकर चल पड़ा। जिला अस्पताल से कुछ ही दूर जाने पर मीडियाकर्मियों की नजर उस पर पड़ी तो उन्हें रोककर बाईक में शव ले जाने की वजह पूछी गई। पीडित ने पूरी जानकारी देते हुए व्यथा सुनाई तो पत्रकारों ने तत्काल सीएमएचओ डॉ. ए.पी. द्विवेदी से फोन पर बात की डॉक्टर द्विवेदी ने सिविल सर्जन से जानकारी लेने की बात कही तो सिविल सर्जन ने मुख्यालय से बाहर होने की बात करते हुए तत्काल शव वाहन भेजने का आश्वासन दिया। एक घंटे से भी अधिक के इंतजार के बाद जब शव वाहन नहीं पहुंचा तो मजबूरन एक गरीब पिता को अपनी पुत्री का शव बाईक पर ले जाना पड़ा।


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