छत्तीसगढ़ में कोरोना वैक्सीन का वेस्टेज केवल 1.36 प्रतिशत, राष्ट्रीय स्तर पर यह दर 6.5 फीसदी, अब तक दी गई 50.56 लाख खुराक

छत्तीसगढ़ में कोरोना वैक्सीन का वेस्टेज केवल 1.36 प्रतिशत, राष्ट्रीय स्तर पर यह दर 6.5 फीसदी, अब तक दी गई 50.56 लाख खुराक

छत्तीसगढ़ में कोरोना वैक्सीन का वेस्टेज केवल 1.36 प्रतिशत, राष्ट्रीय स्तर पर यह दर 6.5 फीसदी, अब तक दी गई 50.56 लाख खुराक
Modified Date: November 29, 2022 / 07:48 pm IST
Published Date: April 20, 2021 2:52 pm IST

रायपुर. 20 अप्रैल 2021। प्रदेश में कोरोना का टीका लगाने के लिए खोली गई वैक्सीन में से वेस्टेज टीके का प्रतिशत मात्र 1.36 है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत 6.5 प्रतिशत है। भारत सरकार के इविन पोर्टल (वह पोर्टल जिसमें कब, कहाँ और कितनी संख्या में टीकाकरण के लिए भेजी गई दवाइयों और उनकी उपलब्धता की जानकारी होती है) के अनुसार छत्तीसगढ़ में अब तक 51 लाख 25 हज़ार 640 कोरोना वैक्सीन की डोज़ का उपयोग किया गया है।

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टीका लगाने के पहले हितग्राही की जानकारी दर्ज की जाने वाले कोविन (ब्व्ॅप्छ) पोर्टल के अनुसार प्रदेश में अब तक पहला और दूसरा डोज मिलाकर कुल 50 लाख 55 हजार 698 डोज लगाए जा चुके हैं। पब्लिक डोमेन में मौजूद भारत सरकार के दोनों पोर्टलों, इविन और कोविन के तुलनात्मक अध्ययन से पता चलता है कि प्रदेश में कोरोना वैक्सीन के मात्र 69 हजार 942 डोज़ ही वेस्ट डोज़ की श्रेणी में आते हैं। यह राज्य में टीकाकरण के लिए खोले गए कुल वैक्सीन का केवल 1.36 प्रतिशत है। पीआईबी द्वारा विगत दिनों में जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार कोरोना वैक्सीन के वेस्टेज का राष्ट्रीय औसत 6.5 प्रतिशत है।

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टीके के एक वायल में कोविड शील्ड वैक्सीन में पांच मिलीलीटर व को-वैक्सीन में दस मिलीलीटर की दवाई होती है, जिसे प्रति व्यक्ति 0.5 मिलीलीटर के हिसाब से दस (कोविड शील्ड) व बीस (को-वैक्सीन) लोगों को लगाया जाता है। टीकाकरण की सेशन साइट पर वायल खुलने के बाद पर्याप्त संख्या में हितग्राही के न आने से कभी-कभी कुछ डोज़ खराब हो जाते हैं। वायल के खुलने के बाद अधिकतम चार घंटे के भीतर ही दवाई को उपयोग में लाया जा सकता है।


लेखक के बारे में

डॉ.अनिल शुक्ला, 2019 से CG-MP के प्रतिष्ठित न्यूज चैनल IBC24 के डिजिटल ​डिपार्टमेंट में Senior Associate Producer हैं। 2024 में महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय से Journalism and Mass Communication विषय में Ph.D अवॉर्ड हो चुके हैं। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से M.Phil और कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर से M.sc (EM) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। जहां प्रावीण्य सूची में प्रथम आने के लिए तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा के हाथों गोल्ड मेडल प्राप्त किया। इन्होंने गुरूघासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर से हिंदी साहित्य में एम.ए किया। इनके अलावा PGDJMC और PGDRD एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स भी किया। डॉ.अनिल शुक्ला ने मीडिया एवं जनसंचार से संबंधित दर्जन भर से अधिक कार्यशाला, सेमीनार, मीडिया संगो​ष्ठी में सहभागिता की। इनके तमाम प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में लेख और शोध पत्र प्रकाशित हैं। डॉ.अनिल शुक्ला को रिपोर्टर, एंकर और कंटेट राइटर के बतौर मीडिया के क्षेत्र में काम करने का 15 वर्ष से अधिक का अनुभव है। इस पर मेल आईडी पर संपर्क करें anilshuklamedia@gmail.com