अदालत ने कोविड की दवाओं पर महाराष्ट्र सरकार और बीएमसी को समन्वय से काम करने को कहा

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अदालत ने कोविड की दवाओं पर महाराष्ट्र सरकार और बीएमसी को समन्वय से काम करने को कहा

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  • Publish Date - October 13, 2020 / 01:58 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 09:00 PM IST

मुंबई, 13 अक्टूबर (भाषा) बम्बई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि मुंबई के नगर निकाय और महाराष्ट्र सरकार को मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए काम करना चाहिए कि नागरिक कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल की जा रही कई दवाओं की उपलब्धता और साथ ही उनकी कीमतों के बारे में अच्छी तरह से वाकिफ हों।

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की पीठ एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें निवेदन किया गया है कि कोविड​​-19 के रोगियों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जा रही दवाओं को सीधे अस्पतालों और पृथक-वास केंद्रों में उपलब्ध कराया जाए, जहां ऐसे रोगियों का इलाज किया जा रहा है।

एनजीओ ‘‘ऑल महाराष्ट्र ह्यूमन राइट्स वेलफेयर एसोसिएशन’’ की ओर से दायर जनहित याचिका में दावा किया गया है कि चूंकि रेमडेसिविर, टेमीफ्लू और एक्टेम्रा इंजेक्शन जैसी दवाएं, जो कि कोविड​​-19 मरीजों के इलाज में महत्वपूर्ण हैं, केवल चुनिंदा दवाखानाओं में उपलब्ध हैं, इस वजह से मरीजों के इलाज में ज्यादा समय लगता है।

याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत पांडे ने पीठ को बताया कि मरीजों की देखभाल करने वाले लोगों को कई बार ये दवाएं खरीदनी पड़ती हैं और उन्हें इसके लिए अधिकतम खुदरा मूल्य से भी अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।’

इसके जवाब में, राज्य सरकार ने कहा कि दवाएं आसानी से उपलब्ध हैं।

सरकार ने कहा कि मुंबई में, रेमडेसिविर की दो लाख खुराक 97 दवाखानाओं में उपलब्ध है।

हालांकि, वकील पांडे ने दावा किया कि उन्होंने इन 97 दुकानों में से कम से कम 20 को कॉल किया था और सभी 20 ने कहा कि उनके यहां दवाएं उपलब्ध नहीं हैं।

इस पर, पीठ ने कहा कि जब राज्य याचिका में प्रतिवादी पक्ष है और उसने अपना जवाब दायर किया है, जबकि बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) प्रतिवादी नहीं है।

पीठ ने याचिकाकर्ता को मामले में बीएमसी को एक पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि नगर निकाय और सभी संबंधित अधिकारियों को दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

भाषा कृष्ण दिलीप

दिलीप