जनता मांगे हिसाब: शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तीनों मोर्चों पर फेल है बमोरी

जनता मांगे हिसाब: शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तीनों मोर्चों पर फेल है बमोरी

जनता मांगे हिसाब: शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तीनों मोर्चों पर फेल है बमोरी
Modified Date: November 29, 2022 / 07:59 pm IST
Published Date: June 15, 2018 10:52 am IST

अब बात मध्य प्रदेश की बमोरी विधानसभा की..सियासी समीकरण और मुद्दों से पहले एक नजर विधानसभा की प्रोफाइल पर

गुना जिले में आती है विधानसभा सीट

आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र

कुल मतदाता-1 लाख 72 हजार 125

पुरुष मतदाता-89 हजार 128

महिला मतदाता-82 हजार 997

वर्तमान में विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा

महेंद्र सिंह सिसोदिया हैं कांग्रेस विधायक

बमोरी विधानसभा में चुनावी रंग दिखाई देने लगे हैं….बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही जीत-हार के समीकरणों में जुट गए हैं..इसके साथ ही टिकट के दावेदार भी सक्रिय दिखाई देने लगे हैं ।

पहले बीजेपी तो अब कांग्रेस का कब्जा ऐसी सियासी तस्वीर है बमोरी विधानसभा की..2003 और 2008 में बीजेपी ने जीत का परचम लहराया लेकिन 2013 में कांग्रेस ने सीट पर कब्जा जमाया..अब फिर चुनाव नजदीक हैं जीत-हार के गुणा-भाग में जुटे गए हैं सियासी दल..इसके साथ ही विधायक की टिकट की चाह की आस में सक्रिय दिखाई देने लगे हैं नेता..बीजेपी हो या फिर कांग्रेस दोनों में दावेदारों की लंबी लाइन है..बात बीजेपी की करें तो पूर्व विधायक केएल अग्रवाल सबसे प्रबल दावेदार हैं..इसके अलावा पूर्व विधायक राजेंद्र सलूजा, ओ एन शर्मा भी दावेदार हैं…बृजमोहन आजाद और महेंद्र किरार भी दावेदारों की लाइन में हैं…अब बात कांग्रेस की करें तो वर्तमान विधायक महेंद्र सिंह सिसोदिया प्रबल दावेदार हैं..तो वहीं विट्ठल दास मीना और सुमेर सिंह गढ़ा भी दावेदारों में शामिल हैं..इसके अलावा देंवेंद्र किरार भी टिकट की आस में हैं ।

बमोरी विधानसभा के मुद्दे

बमोरी विधानसभा शिक्षा,स्थास्थ्य और रोजगार तीनों मोर्चों पर फेल नजर आता है..तो वहीं किसान भी संकटों से उबर नहीं पा रहा । सियासी नक्शे पर तो चमकती दिखाई देती है बमोरी विधानसभा लेकिन विकास के नक्शे पर तस्वीर धुंधली नजर आती है एक नहीं कई समस्याओं से जूझ रही है जनता। अगर सबसे बड़ी समस्या है तो वो है बेरोजगारी…क्योंकि रोजगार के साधन हैं नहीं नतीजा पलायन कर रहे हैं लोग।विधानसभा में किसान भी परेशान है।

लगातार उत्पादन घट रहा है..क्योंकि सिंचाई के पर्याप्त साधन हैं नहीं…तो वहीं उपज का सही दाम भी नहीं मिल पा रहा है। बमोरी में स्कूली और उच्च शिक्षा भी बदहाल है..स्कूलों में शिक्षकों की कमी है तो वहीं उच्च शिक्षण संस्थान नहीं हैं…शिक्षा के साथ स्वास्थ्य सुविधाएं भी बदहाल हैं। आज भी मरीज जिला मुख्यालय जाने को मजबूर हैं। स्वच्छता के मामले में भी फिसड्डी है बमोरी..हालत ये की हर जगह कचरे का अंबार लगा नजर आता है।

 

वेब डेस्क, IBC24

 

 


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