मंदिरों की नगरी उज्जैन ऐतिहासिक धरोहरों के मामले काफी धनी है.. लेकिन विकास की दौड़ में ये धार्मिक नगरी बाकी जिलों से काफी पिछड़ गया है। जिले की जीवनदायिनी शिप्रा नदी तमाम कोशिशों के बाद भी प्रदूषण मुक्त नहीं हो पा रही है। जिले में पेयजल का संकट किसी से छिपी नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो जिला अस्पतालों में डॉक्टर्स की कमी है, जिसके चलते मरीजों को इंदौर रेफर कर दिया जाता है। यहां विकास कार्यों की गुणवत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साल सिंहस्थ के दौरान बनाई गई सड़कें उखड़ने लगी हैं। चैराहे बेजार हो गए हैं।
उज्जैन में कभी बड़े-बड़े कारखाने हुआ करते थे…लेकिन सभी बंद हो चुके हैं और कोई नया उद्योग भी नहीं खुला। जिससे मजदूर वर्ग बदहाली के कगार पर हैं। महाकाल के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु यहां आते हैं लेकिन उनके ठहरने के लिए बेहतर इंतजामों की यहां कमी है। कानून व्यवस्था के मामले में उज्जैन की हालत ठीक नहीं है। यहां सिमी के संदिग्ध आतंकी पकड़े जा चुके हैं।