पिछले 51 साल से इस थाने पर कोई रिपोर्ट ही दर्ज नहीं हुई
पिछले 51 साल से इस थाने पर कोई रिपोर्ट ही दर्ज नहीं हुई
चैरैया का इतिहास बता रहे इस पत्थर में कई अफसाने दर्ज हैं। लेकिन इस पत्थर के पीछे 28 साल पहले स्थापित इस पुलिस चैकी ने इतने सालों बाद भी अपना पहला फरियादी नहीं देखा है। जी हां, करीब 900 की आबादी वाले इस गांव के अलावा ग्राम पंचायत के अंतर्गत दो अन्य गांव और आसपास के दर्जन भर गांव इस पुलिस चैकी के क्षेत्र में आते हैं। लेकिन लोग इतने शांतिप्रिय हैं कि कभी कोई FIR के लायक यहां झगड़ा, मारपीट, मर्डर, चोरी या फिर लूट जैसी वारदात नहीं हुई।
हालांकि पुलिस चैकी की स्थापना के पहले 20 दिसम्बर 1966 की शाम चैरैया घाटी में डाकुओं ने सेक्टर कमांडर कृष्ण मित्र चतुर्वेदी, सब इंस्पेक्टर बाबू सिंह कुशवाहा और मुखबिर हजरत मुशलमान की हत्या कर दी थी। जिनकी समाधि गांव में यहां के खौफ से भरे इतिहास की कहानी कहती है। दस्यु समस्या की वजह से ही यहां 1989 में पुलिस चैकी खोली गई। लेकिन तब से अब तक यहां के रोजनामचे में सिर्फ आमद, रवानगी और तैनाती ही दर्ज होती है।
एक एसआई समेत 6 आरक्षकों के पद यहां के लिए स्वीकृत हैं। लेकिन चैरैया में सिर्फ दो ही पुलिसकर्मी की तैनाती है। जाहिर है अमन के टापू चैरैया को इससे ज्यादा स्टाफ की जरूरत भी नहीं है।

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