जशपुर के बाद बलरामपुर में भी सामने आई पत्थलगढ़ी, कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने
जशपुर के बाद बलरामपुर में भी सामने आई पत्थलगढ़ी, कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने
जशपुर। छत्तीसगढ़ में चारों तरफ अभी सिर्फ एक ही मामला गूंज रहा है वो पत्थलगढी, जशपुर जिले से इसकी शुरुआत हुई थी और वहां इसे लेकर सियासत भी काफी गर्म हुई, पत्थलगढी अब धीरे-धीरे प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिल रही है, बलरामपुर जिले के घोरघडी पंचायत में भी इसकी स्थापना कर दी गई है और उसमें कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, यहां एक नहीं बल्कि दो पत्थर लगाए गए हैं और इससे काफी दहशत भी फैल रही है। पत्थर लगाने वाले आदिवासी नेता और स्थानीय परसु भगत से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होने बताया की गांव में कई तरह के बाहरी लोगों का प्रवेश होता रहता है और उनका क्या उद्देश्य होता है ये समझ नहीं आता, उन्होंने कहा की ऐसे लोगों को रोकने के लिए इसकी स्थापना की गई है। यहां पत्थरगढी को पंचायत की सीमा पर नहीं बल्कि बीच में लगाया गया है।
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वहीं जब इस मामले में क्षेत्रिय विधायक और कांग्रेसी नेता से बात की गई तो उन्होने इसका पूरा ठीकरा सरकार पर मढ दिया। विधायक प्रीतम राम ने कहा की रमन सरकार की पिछली 14 सालों से आदिवासी परेशान हो चुके हैं और उसी से त्रस्त होकर पंचायतों में वो पत्थरगढी की स्थापना कर रहे हैं। उन्होने कहा की आदिवासी क्षेत्रों में विकास हुआ ही नहीं है और उसी के कारण इनमें असंतोष उपजा है जिसे वो पत्थरों में उकेर रहे हैं, उन्होने सरकार से कहा की वो आदिवासीयों की भावनाओं को समझकर इसका निराकरण करे। वहीं मामले में भाजपा के जिलाध्यक्ष पत्थरगढी पर काफी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। उन्होने कहा की पत्थरगढी लगाकर आपसी भाईचारे को तोडा जा रहा है और फूट डालने की कोशिश की जा रही है।
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बलरामपुर जिले में जहां पत्थरगढी लगाया गया है वो भाजपा जिलाध्यक्ष का गृहक्षेत्र भी है इस संबंध में जब उनसे पूछा गया तो उन्होने कहा की इसकी शिकायत वो कलेक्टर से करेंगे। पत्थरगढी के मामले में उन्होने कहा की इसमें कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। प्रदेश में एक तरफ चुनाव की आहट है तो दूसरी ओर पत्थलगढी की बगावत, सरकार चुनाव की गरमाहट में है और पत्थलगढी के मामले में जशपुर में लगातार कार्रवाई भी हो रही है इसके बावजूद प्रदेश के दूसरे हिस्सों में इसी स्थापना चिंता का विषय है।
वेब डेस्क, IBC24

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