शेहला मसूद हत्याकांड: जाहिदा परवेज और सबा फारूखी को सशर्त जमानत

शेहला मसूद हत्याकांड: जाहिदा परवेज और सबा फारूखी को सशर्त जमानत

शेहला मसूद हत्याकांड: जाहिदा परवेज और सबा फारूखी को सशर्त जमानत
Modified Date: November 29, 2022 / 08:19 pm IST
Published Date: July 6, 2017 4:55 pm IST

 

मध्यप्रदेश के बहुचर्चित आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद हत्याकांड में इंदौर के विशेष सीबीआई न्यायालय से दोषी करार दी गई जाहिदा परवेज और सबा फारूखी को गुरूवार को हाई कोर्ट की इंदौर खण्डपीठ ने जमानत दे दी हैं। जस्टिस सतीशचंद्र शर्मा और जस्टिस वीरेंद्र सिंह की डबल बेंचे ने दोनों को 40-40 हजार के निजी मुचलके और 40-40 हजार के की प्रतिभूति पर सशर्त जमानत दी है। 

16 अगस्त 2011 को भोपाल में हुई आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद कि हत्या के मामले में सीबीआई ने जाँच की थी। सीबीआई जांच में भोपाल की इंटीरियर डिजाइनर जाहिदा परवेज, सबा फारूखी, शाकिब डेंजर, इरफान और ताबिश को आरोपी बनाकर इन्हें गिरफ्तार किया था.. केस की सुनवाई के समय आरोपी इरफान सरकारी गवाह बन गया था.. लगभग 5 साल चले केस के बाद सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने जाहिदा, सबा, शकीब डेंजर और ताबिश को दोषी मानते हुए 28 जनवरी 2017 को जाहिदा और सबा को 302, 120 बी में आजीवन कारावास और 1000 रूपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। 

जबकि सरकारी गवाह बने इरफान को बरी कर दिया गया था.. सजा के बाद सीबीआई कोर्ट के आदेश को चुनोती देते हुए हाई कोर्ट इंदौर खंडपीठ में जाहिदा परवेज और सबा फारूखी में जमानत आवेदन लगाया था। इस आवेदन में अपील की गयी थी कि इस मामले का निराकरण होने तक जाहिदा और सबा को जमानत प्रदान की जाए, जिस पर हाई कोर्ट की डबल बेंच ने आज दोनों का जमानत आवेदन स्वीकार कर लिया। जमानती आवेदन में जाहिदा के अधिवक्ता सुरिंदर सिंह ने तर्क दिया था कि सीबीआई द्वारा सरकारी गवाह बनाये गए इरफान के बयानों को आधार बनाकर जाहिदा को सजा सुनाई हैं। जबकि न्यायालय को इरफान के बयानों का रिकार्ड प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि इरफान ने जाहिदा और सबा की हत्याकांड में भूमिका के बारे में कुछ नही कहा हैं। 

सीबीआई न्यायालय में इरफान ने जाहिदा और सबा को पहचानने से इनकार कर दिया हैं। लिहाजा दोनों पर अपराध सिद्ध नही होता हैं।  वही सबा फारूखी की से उनके अधिवक्ता विनय विजयवर्गीय ने जमानती आवेदन के तहत कोर्ट में पक्ष रखते हुए बताया कि सीबीआई न्यायालय में सबा पर लगाए गए आरोपी प्रमाणित नही हुए हैं। उन्होंने बताया अभियोजन केवल सबा को जाहिदा कि मुलाजिम बतौर सहायक सिद्ध करने में सफल रहा हैं। इस आधार पर हत्याकांड में सबा की भूमिका सिद्ध नही हुई हैं, लिहाजा सबा को जमानत दी जाए। डबल बेंच ने सभी पक्षो के तर्क सुनकर बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सुनाते हुए जाहिदा परवेज और सबा फारूकी को शेहला मसूद कि हत्या के प्रकरण में जमानत का लाभ दिया हैं। 

हालांकि जाहिदा परवेज और सबा फारूकी के खिलाफ न्यायिक अभिरक्षा में रहते जैल में मारपीट करना, जैल मैन्युल का उल्लंघन करने के प्रकरण भी दर्ज हैं, जिस पर इस जमानत का आदेश का प्रभाव शून्य रहेगा। आर्डर की सर्टिफाइड कॉपी जिला अदालत भेजी जाएगी, जहां से रिहाई का आर्डर जारी किया जाएगा, इसके बाद दोनों की रिहाई होगी। जाहिदा और सबा दोनों उज्जैन जेल में कैद हैं।

 


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