सरकार इस गांव से सीखे “आदर्श गांव” क्या होता है
सरकार इस गांव से सीखे "आदर्श गांव" क्या होता है
खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है क्या इंसान को देखकर इंसान रंग बदल सकता है, इसका जवाब इतना आसान नही है, मगर यदि हम गरियाबंद जिले के मुंगझर गॉव के विकास को समझे तो जरुर कह सकते है कि इंसान को देखकर इंसान बदल सकता है।
जिले के अंतिम छोर पर ओडिसा सीमा से लगा मुंगझर गॉव वैसे तो दुसरे गॉव की तरह एक सामान्य गॉव है, पर इस गॉव में एक चीज खास है जो इसे दुसरे गॉवों से अलग कर देती है, और वो है शिक्षा, शिक्षा को लेकर इस गॉव के लोग बहुत जागरुक है, यहॉ के पुरुष हो या महिला सभी लोग शिक्षित है, 1700 की आबादी वाले इस गॉव के 889 पुरुषों में 93 प्रतिशत पुरुष और 945 महिलाओं में 89 प्रतिशत महिलायें शिक्षित है, शिक्षा का स्तर इतना बेहतर है कि गॉव के दो लोग क्लास वन ऑफिसर, 8 राजपत्रित अधिकारी और 75 अन्य सरकारी विभागों में अपनी सेवायें दे रहे है, जबकि 22 लोग शासकीय सेवा से रियाटर्ड होकर पेंशन ले रहे है और 40 युवा भर्ती निकलने का इंतजार कर रहे है, 70 परिवार बुनकर समीति से जुडे है, गॉव की सालाना आय 4 करोड से ज्यादा है।
जिस समय लोग शिक्षा को बेफजूल मानते थे उस समय यहॉ के लोगो ने शिक्षा के महत्व को समझा और अपनी आने वाली पीढी को भी शिक्षा के प्रति जागरुक किया, सबसे पहले यहॉ के 22 युवा शिक्षक बने जो आज भले ही रिटायर हो गये हो, पर उन लोगो ने गॉव में शिक्षा को लेकर जागरुकता फैलायी, उनकी इस मेहनत का नतीजा भी निकला, लोगो ने उनकी बात को समझा और अपने बच्चों को शिक्षित बनाने का फैसला लिया, कुछ लोगो ने गरीबी से जुझते हुए अपने बच्चों को शिक्षति किया, जो अपने बच्चों को तालीम देने में बिल्कुल असमर्थ थे उनके लिए गॉव के मालगुजार ने जो खुद धमतरी पॉलिटेक्निकल कॉलेज के प्राचार्य है उन्होंने दरियादिली दिखाई, मतलब गॉव के किसी भी बच्चे को किसी भी कारणवश शिक्षा से महरुम नही होना पडा।
बुजूर्गों ने गॉव में शिक्षा की जो मिशाल कायम की उसमें गॉव की बेटियां भी पीछे नही रही, बेटियों ने भी पढाई में झंडे गाडे, आज गॉव की 4 बेटियां सरकारी नौकरी में है, पंचायत ने भी अबतक अपनी जिम्मेदारी बेखुबी निभाई, ग्राम पंचायत हर साल होनहार बच्चों को सम्मानित करके दुसरे बच्चों को पढाई के लिए प्रेरित करने का काम करती आयी है, गॉव में फैले शिक्षा के प्रकाश को लोग अपने बुजूर्गों का आशिर्वाद मानते है, जिन्हें नौकरी नही मिली पर उन्हें अपने शिक्षित होने पर गर्व है।
मुंगझर के लोग शिक्षा के महत्व को समझ चुके है, बुजूर्गो ने इस परपंरा को शुरु किया और युवा इस परंपरा को आगे बढाने में लगे है, अब देखने वाली बात होगी कि शिक्षा की बदौलत मुंगझरवासियों ने जिस तरह अपनी एक अलग पहचान बनायी है, दुसरे गॉव के लोग भी उनसे कितनी प्रेरणा लेते है और अपने गॉव में शिक्षा का प्रकाश फैलाकर लोगो की जिंगदी में कितना ऊजियारा फैलाते है।

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