(Nanofluid Electrolyte Developed/ Image Credit: AI-generated)
तमिलनाडु: Nanofluid Electrolyte Developed: वैज्ञानिकों ने एक नई नैनोफ्लुइड इलेक्ट्रोलाइट तकनीक विकसित (Nanofluid Electrolyte Developed) की है जो रिचार्ज होने वाली जिंक-एयर बैटरियों की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद कर सकती है। यह तकनीक बैटरी को ज्यादा सुरक्षित, कम लागत वाली और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इसका इस्तेमाल बड़े स्तर के ऊर्जा भंडारण और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए भी किया जा सकता है।
नई नैनोफ्लुइड इलेक्ट्रोलाइट तकनीक (Nanofluid Electrolyte Developed) तीन महीने से अधिक समय तक स्थिर रहती है और इसे सीधे बैटरी निर्माण में इस्तेमाल किया जा सकता है। अब तक जिंक बैटरी में जंग रोकने के लिए महंगे रसायनों का उपयोग किया जाता था। लेकिन इससे ऑक्सीजन से जुड़ी रासायनिक प्रक्रिया प्रभावित होती थी और बैटरी की क्षमता कम हो जाती थी। नई तकनीक इस समस्या को दूर करने में सक्षम है।
तमिलनाडु के तंजावुर स्थित सास्त्रा डीम्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इस नई तकनीक को तैयार किया है। शोधकर्ताओं ने सामान्य इलेक्ट्रोलाइट में सिलिका और जिंक ऑक्साइड के बेहद छोटे नैनोकण मिलाकर नैनोफ्लुइड इलेक्ट्रोलाइट बनाया। इससे बैटरी में बनने वाली अनावश्यक हाइड्रोजन गैस को नियंत्रित किया गया, जिंक के क्षरण को कम किया गया और कैथोड पर ऑक्सीजन प्रतिक्रिया को बेहतर बनाया गया।
वैज्ञानिकों ने बैटरी के लिए ऐसे द्विकार्यात्मक उत्प्रेरक भी तैयार किए हैं जो ऑक्सीजन अपचयन और ऑक्सीजन उत्सर्जन दोनों प्रक्रियाओं को बेहतर तरीके से संचालित करते हैं। शोध में α-MnO₂ को प्रभावी उत्प्रेरक पाया गया। इसमें केवल 2 प्रतिशत तांबा मिलाने से इसकी क्षमता और बढ़ गई। इसका प्रदर्शन प्लैटिनम और रूथेनियम जैसे महंगे उत्प्रेरकों के मुकाबले बेहतर पाया गया।
शोध टीम ने घरेलू जल शोधक से मिले पुराने सक्रिय कार्बन और सर्जिकल मास्क जैसे अपशिष्ट पदार्थों को रिसाइकल कर नई इलेक्ट्रोड सामग्री तैयार की। इससे बेहतर ऊर्जा भंडारण क्षमता वाले इलेक्ट्रोड विकसित किए गए। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तरीका कम लागत में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना ऊर्जा तकनीक को आगे बढ़ा सकता है।
इस तकनीक को भारतीय पेटेंट मिल चुका है और इसे व्यावसायिक उपयोग के लिए तैयार बताया जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, नैनोफ्लुइड इलेक्ट्रोलाइट का इस्तेमाल (Nanofluid Electrolyte Developed) केवल जिंक-एयर बैटरियों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि अन्य जलीय बैटरी तकनीकों में भी किया जा सकता है। इससे भविष्य में सुरक्षित, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के विकास को बढ़ावा मिल सकता है।