WhatsApp Cyber Attack: WhatsApp पर मंडरा रहा बड़ा खतरा, हैकर्स ने अपनाया ऐसा तरीका कि यूजर को भनक तक नहीं लगती, कहीं आपका डेटा भी तो नहीं हो रहा लीक?
WhatsApp Cyber Attack: दुनिया के लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Signal और WhatsApp को लेकर एक बड़ा साइबर सिक्योरिटी अलर्ट सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार रूस समर्थित हैकर्स इन प्लेटफॉर्म्स के यूजर्स को निशाना बना रहे हैं और कई अकाउंट्स को हैक करने में सफल भी हुए हैं।
whatsapp web/ image source: SHUTTERSTOCK
- Signal और WhatsApp पर साइबर अलर्ट
- रूस समर्थित हैकर्स के हमले
- सरकारी अधिकारी भी बने निशाना
WhatsApp Cyber Attack: नई दिल्ली: दुनिया के लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Signal और WhatsApp को लेकर एक बड़ा साइबर सिक्योरिटी अलर्ट सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार रूस समर्थित हैकर्स इन प्लेटफॉर्म्स के यूजर्स को निशाना बना रहे हैं और कई अकाउंट्स को हैक करने में सफल भी हुए हैं। इस साइबर अभियान का मुख्य निशाना सरकारी अधिकारी, सैन्य कर्मी और पत्रकार बताए जा रहे हैं। इस खतरे को लेकर Dutch Intelligence Agencies ने आधिकारिक चेतावनी जारी की है और कहा है कि यह हमला किसी एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर चलाया जा रहा है। एजेंसियों के अनुसार हैकर्स सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर यूजर्स को धोखा देकर उनके अकाउंट तक पहुंच बना रहे हैं।
Signal Facking Alert: खुद को भरोसेमंद व्यक्ति बताते हैं हैकर्स
रिपोर्ट के मुताबिक हैकर्स पहले यूजर्स से चैट के जरिए संपर्क करते हैं और खुद को किसी सपोर्ट बॉट या भरोसेमंद व्यक्ति के रूप में पेश करते हैं। बातचीत के दौरान वे यूजर्स से OTP, वेरिफिकेशन कोड या PIN साझा करने के लिए कहते हैं। जैसे ही यूजर यह जानकारी दे देता है, हैकर्स तुरंत अकाउंट पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं। इसके अलावा एक दूसरा तरीका भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें हैकर्स Signal के Linked Device फीचर का फायदा उठाकर किसी दूसरे डिवाइस को यूजर के अकाउंट से जोड़ देते हैं। इसके बाद उन्हें यूजर की चैट और डेटा तक पहुंच मिल जाती है। कुछ मामलों में सरकारी कर्मचारियों के अकाउंट भी हैक होने की जानकारी सामने आई है, जिससे संवेदनशील और गोपनीय सूचनाओं के लीक होने का खतरा बढ़ गया है।
Russia backed hackers attack: इसी कारण डच एजेंसियों ने चेतावनी दी है
विशेषज्ञों का कहना है कि Signal और WhatsApp दोनों ही End-to-End Encryption तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, जिससे मैसेज केवल भेजने वाले और प्राप्त करने वाले ही पढ़ सकते हैं। लेकिन अगर कोई यूजर खुद ही वेरिफिकेशन कोड या एक्सेस जानकारी साझा कर दे, तो यह सुरक्षा भी बेकार हो जाती है। इसी कारण डच एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक संवेदनशील या सरकारी गोपनीय जानकारी इन मैसेजिंग ऐप्स के जरिए साझा करना पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाना चाहिए।
यूजर्स के लिए साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स की सलाह:
- किसी के साथ भी OTP या verification code साझा न करें।
- अनजान लिंक या संदिग्ध मैसेज पर क्लिक करने से बचें।
- ऐप्स में Two-Factor Authentication हमेशा चालू रखें।
- अकाउंट में संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत पासवर्ड बदलें।
- केवल विश्वसनीय संपर्कों से आई जानकारी पर ही भरोसा करें।
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