आरएसएस के 100 वर्ष सामाजिक जागृति की निरंतर यात्रा का प्रतीक: संपर्क प्रमुख रामलाल

आरएसएस के 100 वर्ष सामाजिक जागृति की निरंतर यात्रा का प्रतीक: संपर्क प्रमुख रामलाल

आरएसएस के 100 वर्ष सामाजिक जागृति की निरंतर यात्रा का प्रतीक: संपर्क प्रमुख रामलाल
Modified Date: April 25, 2026 / 11:36 pm IST
Published Date: April 25, 2026 11:36 pm IST

बरेली (उप्र), 25 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल ने शनिवार को कहा कि आरएसएस द्वारा स्थापना के 100 वर्ष पूरे करना केवल एक संगठन की उपलब्धि नहीं है, बल्कि सामाजिक जागृति, संगठन-निर्माण और राष्ट्र-निर्माण की निरंतर यात्रा का प्रतीक भी है।

उन्होंने कहा कि संघ किसी सरकार, उद्योगपति या बाहरी सहायता पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि स्वयंसेवकों के समर्पण से चलता है। इसी कारण संघ कभी झुका नहीं, डरा नहीं और निरंतर राष्ट्रसेवा में सक्रिय रहा। यह कार्य निःस्वार्थ सेवा, अनुशासन और देशभक्ति पर आधारित है।

बरेली में ‘युवा उद्यमी संगोष्ठी’ को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए रामलाल ने कहा कि आरएसएस के संस्थापक डॉ हेडगेवार ने संगठन की नींव महत्वपूर्ण सिद्धांतों – निस्वार्थ सेवा और आत्मनिर्भरता पर रखी थी।

उन्होंने रेखांकित किया कि आरएसएस किसी सरकार, उद्योगपति या बाहरी सहायता पर निर्भर नहीं है बल्कि यह पूरी तरह से अपने स्वयंसेवकों के समर्पण के माध्यम से कार्य करता है। यही कारण है कि संघ कभी झुका नहीं, डरकर नहीं डिगा और राष्ट्र की सेवा में निरंतर सक्रिय रहा।

रामलाल ने कहा कि भारत इस समय दुनिया का सबसे युवा देश है और आने वाले वर्षों में यही युवा शक्ति भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर आगे बढ़ाएगी।

उन्होंने टिप्पणी की कि नवाचार, अनुसंधान, तकनीकी कौशल और आत्मनिर्भरता के माध्यम से युवा उद्यमी राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

संपर्क प्रमुख ने कहा कि स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना भी राष्ट्र की सेवा का एक प्रभावी साधन है। उन्होंने कहा कि जो उत्पाद विदेशों में निर्मित किए जा सकते हैं, वे निश्चित रूप से भारत में भी उत्पादित किए जा सकते हैं। जरूरत केवल सही दिशा और आत्मविश्वास की है।

भाषा सं जफर धीरज

धीरज


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