सड़क के लिए बिना अधिग्रहण ला मार्टिनियर की जमीन लेने के प्रयास का आरोप
सड़क के लिए बिना अधिग्रहण ला मार्टिनियर की जमीन लेने के प्रयास का आरोप
लखनऊ, नौ मार्च (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने राजधानी के प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थान ला मार्टिनियर कॉलेज की भूमि का उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना उपयोग करने का प्रयास किये जाने के आरोपों के संबंध में लखनऊ के जिला मजिस्ट्रेट को मंगलवार को उसके समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की एक खंडपीठ ने कॉलेज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
अदालत ने पहले संबंधित भूमि की माप करने का निर्देश दिया था, लेकिन अपने आदेश का अनुपालन नहीं करने पर गौर करते हुए, उसने जिला मजिस्ट्रेट को व्यक्तिगत रूप से उसके समक्ष उपस्थित होने और स्थिति स्पष्ट करने को कहा। इस मामले की सुनवाई मंगलवार को होनी है।
याचिका के अनुसार, कॉलेज के पास गणेशगंज स्टेशन क्षेत्र में कोठी मार्टिन साहिब में जमीन है, जहां सरकार ने ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के तहत एक सड़क और फ्लाईओवर बनाने की योजना बनाई है।
कॉलेज ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य उसके स्वामित्व वाली भूमि पर किया जा रहा था, जबकि लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए), जिला प्रशासन या राज्य सरकार ने ना तो कॉलेज की सहमति ली थी और ना ही भूमि अधिग्रहण की कोई प्रक्रिया शुरू की थी।
इससे पहले 27 फरवरी को याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उपमंडल मजिस्ट्रेट (सदर) को राज्य सरकार के अधिकारियों और कॉलेज के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में विवादित भूमि की माप करने और अदालत के समक्ष एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।
सोमवार को सुनवाई के दौरान, संस्थान ने अदालत के समक्ष एलडीए उपाध्यक्ष द्वारा मुख्य सचिव, जो लखनऊ मार्टिनियर चैरिटीज के पदेन वरिष्ठ ट्रस्टी भी हैं, को 27 फरवरी को भेजा गया एक पत्र रखा, जिसमें संस्थान की भूमि पर नौ स्तंभों के निर्माण के लिए सहमति मांगी गई थी।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना संस्था की जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है।
जब पीठ ने राज्य के वकील से माप प्रक्रिया की स्थिति के बारे में पूछा, तो उन्होंने अदालत को सूचित किया कि प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हुई है।
गैर-अनुपालन पर गौर करते हुए, अदालत ने लखनऊ के जिला मजिस्ट्रेट को उसके सामने पेश होने और देरी के बारे में स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया और चेतावनी दी कि उनकी बात सुनने के बाद अवमानना कार्यवाही शुरू की जा सकती है।
लखनऊ में 1845 में फ्रांसीसी परोपकारी क्लाउड मार्टिन की इच्छा के तहत स्थापित, ला मार्टिनियर कॉलेज भारत के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में से एक है।
लखनऊ मार्टिनियर चैरिटीज द्वारा संचालित यह स्कूल अकादमिक उत्कृष्टता की अपनी लंबी विरासत के लिए जाना जाता है और यहां से निकले छात्र बाद में सार्वजनिक जीवन, सशस्त्र बलों और विभिन्न व्यवसायों में सफल हुए।
भाषा सं जफर अमित
अमित

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