आइसा ‘एनईपी’ के जरिये शिक्षा को बेचने के खिलाफ छात्रों को एकजुट कर रहा: नेहा बोरा

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आइसा 'एनईपी' के जरिये शिक्षा को बेचने के खिलाफ छात्रों को एकजुट कर रहा: नेहा बोरा

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  • Publish Date - September 13, 2026 / 08:10 PM IST,
    Updated On - September 13, 2026 / 08:10 PM IST

आजमगढ़ (उप्र), 13 सितंबर (भाषा) ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने रविवार को कहा कि उनका संगठन राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के जरिए ‘शिक्षा को बेचने’ के खिलाफ छात्रों को एकजुट कर रहा है।

नेहा ‘जेन-जेड महाजुटान यात्रा’ के दौरान यहां छात्रों की एक सभा को संबोधित कर रही थीं। यह यात्रा शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर केंद्रित है और प्रयागराज व वाराणसी से गुजरते हुए रविवार को आजमगढ़ पहुंची।

यह जनसभा नेहरू हॉल में आयोजित की गई। बोरा, आइसा की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष मनीष, उपाध्यक्ष सोनाली यादव और भाकपा (माले) के वरिष्ठ नेता जय प्रकाश नारायण ने सभा को संबोधित किया।

बोरा ने कहा, ‘‘यह यात्रा एनईपी 2020 के ज़रिए शिक्षा को बेचने की नीति के खिलाफ एक मुहिम है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। बोरा ने हर स्कूल में पर्याप्त शिक्षक, प्रयोगशालाएं और पुस्तकालय की मांग की।

आइसा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मनीष ने आरोप लगाया कि राज्य में शिक्षकों के लाखों पद खाली हैं, लेकिन भर्ती नहीं की जा रही है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों को रोजगार से जुड़े मुद्दे उठाने से रोकने के लिए विश्वविद्यालयों में छात्र संघों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

उन्होंने कहा कि यह महाजुटान शिक्षा और रोजगार को ‘एक ही संघर्ष के दो हिस्से’ के तौर पर जोड़ रहा है।

भाकपा (माले) के वरिष्ठ नेता जय प्रकाश नारायण ने कहा कि आजमगढ़ ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रतिरोध का केंद्र रहा है और आरोप लगाया कि शिक्षा और लोकतंत्र पर ‘नया हमला’ हो रहा है। आजमगढ़ के आइसा संयोजक अभिषेक ने आरोप लगाया कि जिले के डीएवी महाविद्यालय और शिब्ली नेशनल महाविद्यालय जैसे कई संस्थानों में छात्रों की आवाज दबाई जा रही है।

आइसा की उत्तर प्रदेश इकाई ने अगस्त में अपने राष्ट्रव्यापी ‘जेन जेड राइजिंग’ अभियान के तहत ‘जेन-जेड महाजुटान यात्रा’ की घोषणा की थी। इस यात्रा का मकसद शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को उठाना और छात्रों व युवाओं को एक मंच प्रदान करना था।

बोरा इस साल की शुरुआत में जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के एक प्रमुख चेहरे के तौर पर उभरी थीं, जहां उन्होंने परीक्षा में अनियमितताओं के लिए जवाबदेही की मांग करने के साथ पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए 23 दिन की भूख हड़ताल की थी।

भाषा सं आनन्द

आशीष संतोष

संतोष