आईएएस अधिकारी के इस्तीफे की पेशकश पर अखिलेश यादव और भीम आर्मी प्रमुख ने सरकार को घेरा
आईएएस अधिकारी के इस्तीफे की पेशकश पर अखिलेश यादव और भीम आर्मी प्रमुख ने सरकार को घेरा
लखनऊ, एक अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी रिंकू सिंह राही ने अपनी मूल सेवा यानी पीसीएस संवर्ग में लौटने की इच्छा जाहिर की है, जिसके बाद इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। विपक्षी नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार के शासन में ‘ईमानदार अधिकारियों’ के प्रति प्रशासनिक पक्षपात और उपेक्षा का आरोप लगाया।
फिलहाल लखनऊ में राजस्व परिषद से जुड़े वर्ष 2023 बैच के आईएएस अधिकारी राही ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर अपने मूल संवर्ग यानी प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) में वापस भेजने का अनुरोध किया है। वर्ष 2009 में पीसीएस में उनका चयन हुआ था।
राही ने पत्र में कई महीनों से कोई निर्धारित दायित्व न दिये जाने का हवाला दिया है।
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को राज्य सरकार की तीखी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा शासन में काबिल अधिकारियों की कोई कद्र नहीं है।
यादव ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”कुशल अधिकारियों की भाजपा सरकार में कोई अहमियत नहीं है। भाजपा में तो उनकी पूछ है जिनकी चोरी के पैसों की ही चोरी हो जाती है या जो निवेश तक में पांच प्रतिशत का प्रवेश शुल्क वसूल लेते हैं।”
उन्होंने किसी का नाम लिये बगैर इसी पोस्ट में कहा, ”हर अच्छे अधिकारी से हमारी मांग है कि भावावेश में आकर कोई फैसला न करें, बुरे दिन जानेवाले हैं। पीडीए सरकार आएगी और सबको उचित मान-सम्मान-स्थान देगी क्योंकि पीडीए की सरकार जनता की सरकार होगी, जो समस्याओं के समाधान व असमानताओं को दूर करने के लिए सच में विकास के काम करेगी।”
यादव ने कहा, ”गुणवत्तापूर्ण कार्य और तय समय सीमा के अंदर काम को पूरा करने के लिए हमेशा ही बेहतरीन अधिकारियों की जरूरत पड़ती है। अपने काम में पारंगत अधिकारियों की हमने हमेशा क़द्र की है और आगे भी करेंगे। पीड़ित अधिकारी हो या कर्मचारी सभी भाजपा को हटाने के लिए पीडीए के साथ हैं। ’पीड़ा’ बढ़ रही है, इसीलिए ‘पीडीए’ बढ़ रहा है।”
आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और नगीना सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इस घटनाक्रम को ‘बेहद चिंताजनक’ बताया और कहा कि यह प्रशासनिक व्यवस्था में मौजूद बड़ी समस्याओं का संकेत है।
उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, ”उत्तर प्रदेश में जहां एक ओर आईएएस अधिकारी दलित समाज के मंत्रियों के साथ प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे और उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, वहीं दूसरी ओर एक दलित आईएएस अधिकारी उपेक्षा के चलते इस्तीफा देने को मजबूर हैं। यह स्थिति बेहद चिंताजनक और सवालों से भरी है।”
आजाद ने कहा कि दलित समाज से आने वाले रिंकू सिंह राही का ‘इस्तीफा’ किसी एक अधिकारी का व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है।
उन्होंने कहा, ”एक ऐसा अधिकारी जिसने 2009 में भ्रष्टाचार उजागर किया, जानलेवा हमले में सात गोलियां खाईं, फिर भी सिस्टम के भीतर रहकर जनसेवा करना चाहता रहा है। आज वही यह कहने को मजबूर है कि उसे काम ही नहीं दिया जा रहा और इसी उपेक्षा के कारण उसे इस्तीफा देना पड़ा।”
आजाद ने कहा कि तीन दिन पहले ही कन्नौज में राज्य मंत्री असीम अरुण को मुख्य अतिथि बनाकर बुलाया गया लेकिन उन्हें 45 मिनट तक इंतजार कराया गया और अंत में बिना कार्यक्रम के लौटना पड़ा।
उन्होंने कहा, ”वहीं, पिछले साल भूतपूर्व राज्यपाल और वर्तमान कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य जी द्वारा अपने गृह जनपद आगरा में बुलाई गई किसानों की बैठक में अधिकारी पहुंचे ही नहीं, जिससे उन्हें बैठक स्थगित करनी पड़ी। यह विरोधाभास केवल संयोग नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था के भीतर मौजूद गंभीर असंतुलन और सवालों की ओर इशारा करता है।”
भाषा सलीम जोहेब
जोहेब

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