विदेशी निधियों को लेकर अखिलेश ने भाजपा पर उठाए सवाल, एफसीआरए संशोधन को ‘नियंत्रण’ की रणनीति बताया

विदेशी निधियों को लेकर अखिलेश ने भाजपा पर उठाए सवाल, एफसीआरए संशोधन को ‘नियंत्रण’ की रणनीति बताया

विदेशी निधियों को लेकर अखिलेश ने भाजपा पर उठाए सवाल, एफसीआरए संशोधन को ‘नियंत्रण’ की रणनीति बताया
Modified Date: April 1, 2026 / 01:06 pm IST
Published Date: April 1, 2026 1:06 pm IST

लखनऊ, एक अप्रैल (भाषा) विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला करते हुए सपा के प्रमुख अखिलेश यादव ने बुधवार को कथित विदेशी निधियों को लेकर सत्तारूढ़ पार्टी पर सवाल उठाया और उस पर कानून के माध्यम से गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) को ‘‘नियंत्रित’’ करने का प्रयास करने का आरोप लगाया।

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक लंबे पोस्ट में यादव ने कहा कि विदेशी निधि पर भाजपा के रुख में ‘‘गंभीर विरोधाभास’’ था। उन्होंने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 लाने से पहले स्पष्टता की मांग की।

उन्होंने कहा, ‘‘जो पैसा विदेशों से ‘पीएम केयर्स फंड’ में आया था वो लौटाया जाएगा या उसको भी ऑडिट की तरह विशेष छूट देकर गटक लिया जाएगा।’’

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने इलेक्टोरल बॉण्ड को लेकर भी सवाल उठाए जिन्हें उच्चतम न्यायालय ने पहले ही रद्द कर दिया था। उन्होंने पूछा, ‘‘जो पैसा इलेक्टोरल बॉण्ड के माध्यम से आया था उसे भाजपा कब लौटाएगी। जब इलेक्टोरल बॉण्ड ही अवैध घोषित हो गये हैं तो उससे मिला पैसा कैसे वैध है।’’

यादव ने पूछा कि जो पैसा ‘‘गैर पंजीकृत एनजीओ’’ के खातों में आता है उसका क्या होगा। कहीं ये उसी की विदेशी जड़ें काटने की आपसी लड़ाई तो नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘तथाकथित धर्मार्थ उगाहे गये, मंदिर निर्माण के नाम पर बटोरे गए उस चंदे का हिसाब कौन देगा, जो भाजपा से संबद्ध संगी-साथी मुखौटा संगठनों मतलब परिषद, वाहिनी आदि ने हड़प लिए। उसमें भी विदेशों से अथाह पैसा आया था। इनसे जुड़े सभी पदाधिकारियों के खातों और संपत्तियों से वसूली की जाए।’’

भाजपा पर ‘‘तानाशाही दृष्टिकोण’’ अपनाने का आरोप लगाते हुए लोकसभा सदस्य ने कहा कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य स्वतंत्र संगठनों को सरकार के नियंत्रण में लाना है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता ने कहा, ‘‘दरअसल ये भाजपाई राजनीति की अलोकतांत्रिक, अति नियंत्रणवादी एकाधिकारी सोच के हैं जो गैर सरकारी संगठनों पर अवांछित नियंत्रण करके, उन्हें अपनी कठपुतली बनाना चाहती है और इसके बहाने धीरे-धीरे उनकी संपत्ति को ही हड़प लेना चाहती है।’’

उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार खुद तो कुछ करती नहीं है और जो सच्चे स्वतंत्र गैर सरकारी संगठन अच्छा काम कर रहे हैं उनको भी नहीं करने देना चाहती है क्योंकि कई बार जनता कहती है कि सरकार से ज्यादा अच्छा काम तो गैर सरकारी संस्थाएं कर दिखाती हैं, इससे कई मोर्चों पर सरकार की बेहद किरकिरी होती है और भाजपाइयों की नाकामी उजागर हो जाती है।

लोकसभा में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के नेता यादव ने पूछा, ‘‘भाजपा ये भी बताए कि जो पैसा विदेश से विधि-विधान से आ रहा है उस पर तो इतने प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं लेकिन उस अकूत धन का क्या जो अवैध रूप से विदेश जा रहा है मतलब जो दौलत उनके मित्र विदेश ले जाकर और वहां बेखौफ रहकर आराम से ऐश कर रहे हैं, उनकी जमीनें-संपत्ति कब जब्त करके वसूली की जाएगी या उन ‘भगोड़े भाजपाई भाईयों’ को वैसे ही विशेष छूट मिलती रहेगी जैसे कि साम्राज्यवादी ताकतों का साथ देनेवाले उनके मुखबिर संगी-साथियों और वैचारिक पूर्वजों को स्वतंत्रता से पहले मिलती रही थी।’’

उन्होंने कहा कि जनता इस बार भाजपा का पक्षपात का एटीएम बंद कर देगी।

उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा की बदनीयत और बेईमानी ही उसके हर विधेयक की बुनियाद होती है। भाजपा जाए तो चैन आए!’’

यादव की यह टिप्पणी 25 मार्च को लोकसभा में पेश किए गए विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) में प्रस्तावित संशोधन पर राजनीतिक विवाद के बीच आई है।

भाषा जफर सुरभि

सुरभि


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