लखनऊ, तीन सितम्बर (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन के सिलसिले में सांस्कृतिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में लेने की कार्रवाई को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा रद्द किए जाने के बाद बृहस्पतिवार को राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार पर निशाना साधा।
यादव ने सोशल मीडिया पर अदालत के आदेश से संबंधित एक खबर की क्लिप साझा करते हुए कहा, ‘‘जिलाधिकारी पर नाजायज काम करने के लिए उच्च न्यायालय ने जुर्माने तो लगा दिया लेकिन उनका क्या होगा, जिनके दिशानिर्देश में यह सब प्रतिशोधात्मक काम हो रहा है?’’
उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा, ‘‘डी से पहले तो सी आता है ना? बाकी जनता समझदार है।’’
माना जा रहा है कि यादव की इस टिप्पणी में ‘सी’ का इशारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (भाकपा-माले) ने भी उच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत किया और कहा कि इस फैसले ने योगी आदित्यनाथ सरकार के ‘‘झूठ’’ को उजागर कर दिया है।
भाकपा-माले के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि आकृति चौधरी के बाद सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार सत्यम वर्मा को भी रिहा किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पुलिस ने वर्मा को भी उन्हीं आरोपों में गिरफ्तार किया था, जिनके तहत आकृति चौधरी को गिरफ्तार किया गया था।
सुधाकर यादव ने इस साल अप्रैल में नोएडा में हुए श्रमिकों के प्रदर्शन में शामिल श्रमिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने की भी मांग की।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नोएडा में श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में गिरफ्तार आकृति चौधरी को रासुका के तहत निरुद्ध किए जाने की कार्रवाई को बुधवार को रद्द कर दिया।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की पीठ ने चौधरी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें हिरासत में लेने की पुलिस की कार्रवाई ‘‘मनगढ़ंत’’ कहानी पर आधारित थी।
अदालत ने निर्देश दिया कि अगर वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए।
अदालत ने गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी के वेतन से पांच लाख रुपये मुआवजे के तौर पर चौधरी को देने का भी आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने आरोप लगाया था कि चौधरी ने प्रदर्शनकारियों को आगजनी और पथराव के लिए उकसाया था।
अदालत ने हालांकि पुलिस के दावे के समर्थन में पेश की गई सामग्री की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
इस बीच, गौतम बौद्ध नगर के पुलिस अधिकारियों ने बताया कि चौधरी की तत्काल रिहाई संभव नहीं है क्योंकि उनके खिलाफ उसी प्रकरण से संबंधित कुछ अन्य मामले अब भी लंबित हैं।
भाषा सलीम जितेंद्र
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