लखनऊ, दो सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बुधवार को निर्देश दिया कि सुलतानपुर में एक सड़क को चौड़ा करने के काम की जारी जांच निष्पक्ष और बिना किसी भेदभाव के की जाए और इसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक राज प्रसाद उपाध्याय के प्रति कोई अनुचित रियायत न बरती जाए।
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की पीठ ने कहा कि जांच का तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे लोगों का विश्वास बढ़े और संदेह की कोई गुंजाइश न रहे।
अदालत ने यह टिप्पणी सिद्धार्थ इंफ्राहाइट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर एक याचिका का निपटारा करते हुए की।
कंपनी ने 10 अप्रैल 2026 के उस पत्र को चुनौती दी थी जिसमें सुलतानपुर में वीरसिंहपुर-पापरघाट-शाहपुर हरबंश सड़क को चौड़ा और मजबूत करने के काम की जांच का आदेश दिया गया था।
याचिकाकर्ता ने सुलतानपुर सदर के विधायक राज प्रसाद उपाध्याय को निर्माण कार्य में दखल देने से रोकने के निर्देश देने की मांग की थी और अनुरोध किया था कि काम की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।
याचिकाकर्ता के वकील ने सुनवाई के दौरान लखनऊ में लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता द्वारा सुलतानपुर में विभाग के अधिशासी अभियंता को भेजे गए 28 जुलाई 2026 के पत्र का हवाला दिया।
अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि चूंकि शिकायतकर्ता विधायक हैं इसलिए जांच के दौरान उन्हें बहुत ज्यादा रियायत दी जा रही थी और कार्यवाही में उठाए जा रहे हर कदम की जानकारी उन्हें दी जा रही थी।
पीठ ने दोनों पत्रों की जांच करने के बाद कहा कि जांच जारी रहनी चाहिए लेकिन विधायक के प्रति कोई अनुचित रियायत नहीं बरती जानी चाहिए।
अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि जांच निष्पक्ष और भेदभाव-रहित होनी चाहिए और अपनाई गई प्रक्रिया भी निष्पक्ष एवं पारदर्शी दिखनी चाहिए ताकि इसके संचालन के तरीके को लेकर कोई संदेह पैदा न हो।
पीठ ने इन टिप्पणियों के साथ याचिका को निस्तारित कर दिया।
भाषा सं. सलीम शफीक
शफीक