उप्र सरकार पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट पेश करे: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

उप्र सरकार पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट पेश करे: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

उप्र सरकार पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट पेश करे: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
Modified Date: June 3, 2026 / 10:20 pm IST
Published Date: June 3, 2026 10:20 pm IST

लखनऊ, तीन जून (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बुधवार को राज्य सरकार को पंचायत चुनाव से संबंधित पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

अदालत ने इसी के साथ उत्तर प्रदेश राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) से चुनाव कराने के संभावित कार्यक्रम को स्पष्ट करने को कहा।

यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी की अवकाश पीठ ने पारित किया।

पीठ ने यह आदेश एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करने के दौरान पारित किया। याचिका में 26 मई को कार्यकाल समाप्त होने के बाद मौजूदा ग्राम प्रधानों (ग्राम प्रधानों) को प्रशासक नियुक्त करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती दी गई।

जनहित याचिका स्थानीय वकील ओम प्रकाश प्रजापति ने दायर की है। मामले में अगली सुनवाई 10 जुलाई तय की गई है।

याचिकाकर्ता ने 25 मई के सरकारी आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत मौजूदा ग्राम प्रधानों को उनका पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रशासक के रूप में नियुक्त किया गया था।

याचिका के अनुसार, उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 12 ग्राम प्रधान के कार्यकाल को शपथ लेने की तारीख से पांच वर्ष तक सीमित करती है। इसमें दलील दी गई कि निर्धारित अवधि के भीतर पंचायत चुनाव न कराकर और बाद में निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक के रूप में नियुक्त करके, राज्य ने प्रभावी रूप से उनके कार्यकाल को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया है, जो कानून के विपरीत है।

याचिका में ग्राम प्रधानों केा प्रशासक नियुक्त करने संबधी राज्य सरकार के 25 मई के आदेश को चुनौती दी गई है।

याचिका में अनुरोध किया गया कि पूर्व व्यवस्था के तहत यदि पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पा रहे तो एडीओ पंचायत या किसी अन्य अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया जाय।

भाषा सं जफर धीरज

धीरज


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