Bahraich News: बहराइच में भेड़िए का आतंक जारी, 24 घंटे में 7 लोगों पर किया हमला, CM के आदेश भी निष्क्रिय
Bahraich News: ग्रामीणों के अनुसार, भेड़िया अलग-अलग स्थानों पर अचानक हमला कर रहा है और अब तक कई लोग घायल हो चुके हैं। लगातार हो रहे इन हमलों ने पूरे इलाके में आतंक का माहौल पैदा कर दिया है।
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- 24 घंटों में भेड़िए ने 7 लोगों पर हमला किया
- ग्रामीणों में दहशत, घर से निकलना हुआ मुश्किल
- वन विभाग फेल, CM के आदेश भी निष्क्रिय
रिपोर्ट – सरफ़राज़ आलम
बहराइच (कैसरगंज): Bahraich News, उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के कैसरगंज तहसील स्थित मंझारा तौकली गांव में इन दिनों भेड़िए के ताबड़तोड़ हमलों से ग्रामीण दहशत में हैं। बीते 24 घंटों में भेड़िए ने 7 लोगों पर हमला किया है, जिनमें मासूम बच्चे और एक बुजुर्ग महिला भी शामिल हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, भेड़िया अलग-अलग स्थानों पर अचानक हमला कर रहा है और अब तक कई लोग घायल हो चुके हैं। लगातार हो रहे इन हमलों ने पूरे इलाके में आतंक का माहौल पैदा कर दिया है।
वन विभाग फेल, CM के आदेश भी निष्क्रिय
Bahraich News, घटना को लेकर वन विभाग की लापरवाही पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री द्वारा भेड़िए को शूट करने का आदेश पहले ही जारी किया जा चुका है, बावजूद इसके एक भी भेड़िए को न मारा गया, न पकड़ा गया। DFO राम यादव के नेतृत्व में वन विभाग की टीम अब तक भेड़िए को पकड़ने में नाकाम रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग के प्रयास सिर्फ कागज़ों तक सीमित हैं, ज़मीनी स्तर पर कोई असर नहीं दिख रहा।
ग्रामीणों में दहशत, घर से निकलना हुआ मुश्किल
लगातार हो रहे हमलों के कारण ग्रामीणों का रात में बाहर निकलना तो दूर, अब दिन में भी खेतों और जंगल की तरफ जाना मुश्किल हो गया है। बच्चों को स्कूल भेजने में परिजन डर रहे हैं, और लोग समूह में निकलने को मजबूर हैं।
प्रशासन पर उठे सवाल
एक ओर मुख्यमंत्री का स्पष्ट आदेश, दूसरी ओर प्रशासन की लापरवाही – इस विरोधाभास ने प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि भेड़िए को जल्द से जल्द शूट किया जाए और इलाके में गश्त बढ़ाई जाए, ताकि जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
भेड़िए के लगातार हो रहे हमलों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जंगल और आबादी की दूरी लगातार घट रही है, और ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई न होने से आमजन की जान जोखिम में पड़ जाती है। अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन कब तक जागता है और कब तक ग्रामीणों को इस भय से मुक्ति मिलती है।

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