Ballia Ragini School Student Viral Video || Image- IBC24 News File
अमित कुमार/बलिया: जिले के रहने वाली एक 7 साल की एक बच्ची एक पैर के सहारे 400 मीटर का स्कूल का सफर तय कर रही है। जब रागिनी महज 6 महीने की थी, तब एक हादसे में उसने अपना एक पैर खो दिया। (Ballia Ragini School Student Viral Video) लेकिन पैर खोने के बाद भी उसने हौसला नहीं खोया। आज उसकी आंखों में सिर्फ एक सपना है, स्कूल जाकर पढ़ाई करने का।
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वही अब सोशल मीडिया ने अपनी ताकत दिखाई है। एक पैर से स्कूल जाने वाली रागिनी का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, लोगों ने शासन-प्रशासन से तत्काल मदद की अपील की। हालाँकि अब खबर है कि, जिला कलेक्टर ने इस मामले में संज्ञान ले लिया है। इस संबंध में जिले के कलेक्टर ने वीडियो भी जारी की है।
लंगड़ाती बिटिया का Video जिसने देखा, उसके आंसू निकल पड़े। कल रात से अब तक कम से 20 मैसेज मेरे पास आए हैं, जिसमें लोगों ने उस बिटिया को ट्राइसाइकिल देने की इच्छा जाहिर की है।
इधर, बलिया के DM का बयान आया है। उन्होंने बिटिया के घर दिव्यांगजन अधिकारी और डॉक्टर भेजे हैं। आज जांच… https://t.co/wTPCXhr2ay pic.twitter.com/wUtjX4BNNJ
— Sachin Gupta (@Sachingupta) September 2, 2026
बलिया जिले के मनियर ब्लॉक की दिघेड़ा ग्राम सभा के रानीपुर की रहने वाली रागिनी के पास एक पैर नहीं है, लेकिन पढ़ने की ललक किसी से कम नहीं। रागिनी की मां बबीता देवी बताती हैं कि जब रागिनी 6 महीने की थी, तब वह उसे गोद में लेकर दवा लेने जा रही थीं। इसी दौरान रास्ते में हादसा हो गया। (Ballia Ragini School Student Viral Video) हादसे में रागिनी का एक पैर बुरी तरह जख्मी हो गया। कई जगह इलाज कराया गया, लेकिन पैर पूरी तरह खराब हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि बेहतर इलाज कराना भी संभव नहीं हो सका।
आज रागिनी 7 साल की है। एक पैर के सहारे ही वह अपने रोजमर्रा के काम करती है। जब मोहल्ले के बच्चे स्कूल जाने के लिए बस्ता लेकर उसके घर के सामने से गुजरते हैं, तो रागिनी की आंखों में आंसू आ जाते हैं। वह कहती है, मुझे भी पढ़ना है।
रागिनी प्राथमिक विद्यालय दिघेड़ा में कक्षा-1 की छात्रा है। उसका स्कूल घर से महज 400 मीटर दूर है, लेकिन उसके लिए यह सफर किसी लंबे रास्ते से कम नहीं। कभी परिवार का कोई सदस्य उसे स्कूल छोड़ने जाता है, तो कभी वह खुद एक पैर के सहारे कूदते हुए स्कूल के लिए निकल पड़ती है। इस 400 मीटर के सफर में रागिनी कई बार जमीन पर बैठ जाती है, थक जाती है और रोने लगती है। उसके मन में एक ही सवाल उठता है, भगवान, मेरे साथ ही ऐसा क्यों किया?
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रागिनी के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। उसके पिता मजदूरी करते हैं। परिवार अब रागिनी के लिए महंगे इलाज की नहीं, बल्कि एक ऐसे सहारे की उम्मीद कर रहा है, जिससे उसका स्कूल तक पहुंचना आसान हो सके। (Ballia Ragini School Student Viral Video) परिवार को एक कृत्रिम पैर या ट्राईसाइकिल की जरूरत है, ताकि रागिनी अपने स्कूल का सफर बिना परेशानी के तय कर सके।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक अजीत पाल ने बताया कि रागिनी कक्षा-1 की छात्रा है और उसका पैर पूरी तरह डैमेज है। उसे स्कूल आने-जाने में काफी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि रागिनी को सरकार से मदद मिलनी चाहिए। योजना का लाभ देने के लिए उसका रजिस्ट्रेशन किया गया है। एडमिशन देर से होने की वजह से वह पिछली योजना का लाभ नहीं ले सकी, लेकिन योजना आने पर उसे मदद दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
एक पैर खोने के बावजूद रागिनी हार मानने को तैयार नहीं है। उसके हौसले में पढ़ने की चाहत है और आंखों में बेहतर भविष्य का सपना। अब सवाल यही है कि क्या सिस्टम रागिनी की इस हिम्मत का साथ देगा? क्या उसके 400 मीटर के इस मुश्किल सफर को आसान बनाने के लिए उसे वह सहारा मिल पाएगा, जिसकी उसे सबसे ज्यादा जरूरत है?
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