Tawaif news/ image source: META AI
Ballia News: उत्तरप्रदेश के बलिया से आई यह ख़बर समाज और इतिहास के बीच जुड़ी संवेदनशीलता को उजागर करती है। बलिया मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर पंदह ब्लॉक में स्थित 800 मतदाता वाला गांव रूपवार तवायफ आज भी अपने नाम के कारण सामाजिक कलंक झेल रहा है। गांव के बुजुर्गों के अनुसार, अंग्रेजों के शासनकाल में इस गांव को उनकी अय्यासी और मनोरंजन के लिए चुना गया था।
तब करीब 400 तवायफों को इस गांव में बसाया गया, और शाम होते ही यह गांव अंग्रेजों के मजमा का ठिकाना बन जाता था। अंग्रेज चले गए, लेकिन उनके द्वारा लगाए गए कलंक के निशान आज भी लोगों की ज़िन्दगी पर भारी हैं। गांव के लोग, विशेषकर महिलाएं, अपने गांव का नाम बताने में शर्म महसूस करती हैं। शहरों में नौकरी या रूम बुकिंग के दौरान उनके ID कार्ड पर गांव का नाम “रूपवार तवायफ” देखकर उन्हें बुरी नज़रों का सामना करना पड़ता है। युवा पीढ़ी इस कलंक से बचने के लिए अपने निवास के पते में शहर का नाम डालकर रह रही है।
पंचदेव यादव, गांव के बुजुर्ग ग्रामीण, बताते हैं कि “लोग हमारे गांव के नाम सुनकर हंसते हैं। वोटर ID कार्ड या सरकारी दस्तावेजों में आज भी रूपवार तवायफ ही दर्ज है। कई बार सरकार से नाम बदलने की मांग की, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।”
गांववालों का कहना है कि उनका मकसद सिर्फ सम्मान वापस पाना है। सुरेश वर्मा, एक ग्रामीण, कहते हैं, “हम चाहते हैं कि मुख्यमंत्री जी हमारे गांव वालों पर लगा कलंक मिटा दें और हमारा सम्मान वापस दिलाएँ। हमें अपने बच्चों और महिलाओं को इस शर्मिंदगी से बचाना है।”
पूर्व प्रधान राजदेव चौधरी ने भी कहा कि नाम बताने पर हमेशा शर्मिंदगी होती है और लोग मज़ाक उड़ाते हैं। उन्होंने आगे कहा, “हम चाहते हैं कि गांव का नाम बदलकर ‘देवपुर’ रखा जाए, जो देवताओं के नाम पर हो। इससे युवा और महिलाएं समाज में सिर ऊँचा करके रह सकें। आज भी रिश्तेदारी जोड़ने से पहले लोग सोचते हैं कि कहीं तवायफों का प्रभाव तो नहीं है।”
गांव के वर्तमान प्रधान ने बताया कि वे पिछले 10 साल से लगातार इस मुद्दे को लेकर प्रयास कर रहे हैं। तत्कालीन मंत्री रामगोविंद चौधरी से भी मुलाकात की गई थी, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। प्रधान के अनुसार, “हम चाहते हैं कि प्रशासन इस कलंकित नाम को बदलकर गांव के लोगों को सम्मान दिलाए। यह केवल हमारी नहीं, बल्कि हमारे गांव की आने वाली पीढ़ियों की आवाज़ है।”