फिरोजाबाद के जे. एस. विश्वविद्यालय के खिलाफ ‘परिसमापन’ प्रस्ताव पर मंत्रिमंडल की मुहर
फिरोजाबाद के जे. एस. विश्वविद्यालय के खिलाफ 'परिसमापन' प्रस्ताव पर मंत्रिमंडल की मुहर
लखनऊ, छह जनवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल ने फर्जी डिग्रियां बांटे जाने तथा अन्य आरोपों को लेकर विभिन्न जांच रिपोर्टों के मद्देनजर फिरोजाबाद स्थित जे. एस. विश्वविद्यालय के खिलाफ लाए गए ‘परिसमापन’ संबंधी प्रस्ताव को मंगलवार को मंजूरी दे दी।
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिये गये इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी दी। उपाध्याय ने संवाददाताओं को बताया कि बैठक में फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद स्थित जे. एस. विश्वविद्यालय के परिसमापन (बंद करने) संबंधी प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गयी।
परिसमापन किसी संस्था, कंपनी या व्यवसाय को स्थायी रूप से बंद करने की कानूनी प्रक्रिया को कहते हैं।
इस निजी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले लगभग चार हजार छात्र-छात्राओं के भविष्य के लिए आगरा स्थित भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति की अध्यक्षता में एक त्रिस्तरीय अंतरिम समिति गठित की गई है। यह समिति परिसमापन की अवधि में विश्वविद्यालय की गतिविधियों का संचालन करेगी।
उन्होंने बताया कि जे. एस. विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2015 में हुई थी। पिछले साल नौ मार्च को एक समाचार पत्र में छपा था कि राजस्थान की शारीरिक शिक्षा अध्यापक परीक्षा 2022 में इस विश्वविद्यालय से पढ़े जो अभ्यर्थी चयनित हुए थे उनकी बीपीएड की डिग्री और अंकपत्र जांच में फर्जी पाये गये हैं।
इस मामले में जे. एस. विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर सुकेश यादव और कुलसचिव वंदन मिश्र को गिरफ्तार किया गया था।
उपाध्याय ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2019 की धारा 55 (1) के अंतर्गत उच्च शिक्षा परिषद के अवर सचिव से जांच कराने के निर्देश दिए थे। मगर उन्हें जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
इस पर शासन स्तर पर दिये गये आदेश के तहत फिरोजाबाद के जिलाधिकारी को निर्देशित किया गया कि वह एक समिति गठित कर इसकी जांच करें। इसी बीच, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, जयपुर की ओर से उत्तर प्रदेश के गृह विभाग से जांच कराए जाने का अनुरोध किया गया जिस पर आर्थिक अपराध शाखा द्वारा जांच कराई गई।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि जे. एस. विश्वविद्यालय द्वारा अधिनियम की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन किया गया है। इनमें डिग्री प्रदान करने की शक्ति का दुरुपयोग, संगठित अपराध के रूप में फर्जी अंकतालिकाओं एवं डिग्रियों का वितरण, आवश्यक भूमि मानक का पालन न करना तथा उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद को अनिवार्य विवरण उपलब्ध न कराना शामिल है।
उपाध्याय ने बताया कि इन सभी जांचों तथा जयपुर पुलिस की जांच रिपोर्ट के आधार पर मंत्रिमंडल ने जे. एस. विश्वविद्यालय के परिसमापन का प्रस्ताव मंत्रिमंडल ने पारित कर दिया।
उन्होंने बताया कि अब आगरा के डॉक्टर भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के संरक्षण में जे. एस. विश्वविद्यालय के सभी अभिलेख रखे जाएंगे और उन दस्तावेजों के आधार पर इस निजी विश्वविद्यालय द्वारा जारी अंकपत्र और डिग्री को आगरा विश्वविद्यालय प्रमाणित करके देगा।
उच्च शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि जे. एस. विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले लगभग चार हजार छात्र-छात्राओं के भविष्य के लिए निजी विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 55 (6) के तहत आगरा के डॉक्टर भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति की अध्यक्षता में एक त्रिस्तरीय अंतरिम समिति गठित की गई है। यह समिति परिसमापन की अवधि में विश्वविद्यालय की गतिविधियों का संचालन करेगी।
उपाध्याय ने बताया कि मंत्रिमंडल द्वारा पारित एक अन्य प्रस्ताव में मेरठ के आईआईएमटी विश्वविद्यालय को नोएडा में अपना ‘शैक्षणिक केंद्र’ खोलने के लिये प्राधिकार पत्र दिये जाने को मंजूरी दे दी गयी।
उन्होंने बताया कि आईआईएमटी विश्वविद्यालय ने मेरठ स्थित अपने मुख्य परिसर के अतिरिक्त नोएडा में एक ‘शैक्षणिक केंद्र’ खोलने के लिए आवेदन किया था। इस सिलसिले में उसे पिछले साल 25 फरवरी को आशय पत्र दिया गया था। अब उसके संचालन के लिए प्राधिकार पत्र दिए जाने का प्रस्ताव आज मंत्रिमंडल में पारित किया गया है।
उपाध्याय ने बताया कि नियमत: अगर कोई विश्वविद्यालय पांच साल तक अपना संचालन करता है और किसी अन्य स्थान पर अपना ‘शैक्षणिक केंद्र’ खोलना चाहता है तो अर्हता पूरी करने पर उसे यह केंद्र खोलने की इजाजत दी जाती है।
भाषा
सलीम मनीषा संतोष रवि कांत

Facebook


