उप्र में हवाई अड्डे की तर्ज पर 49 और बस अड्डे बनाए जाने के प्रस्ताव को मंत्रिमंडल की मंजूरी

उप्र में हवाई अड्डे की तर्ज पर 49 और बस अड्डे बनाए जाने के प्रस्ताव को मंत्रिमंडल की मंजूरी

उप्र में हवाई अड्डे की तर्ज पर 49 और बस अड्डे बनाए जाने के प्रस्ताव को मंत्रिमंडल की मंजूरी
Modified Date: April 7, 2026 / 01:53 pm IST
Published Date: April 7, 2026 1:53 pm IST

लखनऊ, सात अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने राज्य में हवाई अड्डे जैसी जन सुविधाओं से लैस 49 नये बस अड्डों का निजी-सार्वजनिक भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर निर्माण कराये जाने के प्रस्ताव को मंगलवार को मंजूरी दे दी।

परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने मंत्रिमंडल की बैठक में लिये गये इस निर्णय की जानकारी देते हुए प्रेस वार्ता में बताया कि प्रदेश में पीपीपी मॉडल पर 49 और बस अड्डों के निर्माण से सम्बन्धित प्रस्ताव को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है।

उन्होंने बताया कि पहले चरण में 23 बस अड्डों को बनाने की मंजूरी कैबिनेट से मिल चुकी थी, जिनमें लखनऊ, कानपुर तथा आगरा के तीन-तीन बस अड्डे शामिल हैं।

सिंह ने बताया कि इन बस अड्डों पर वीआईपी लाउंज, रेस्तरां और सिनेमा हॉल समेत वे सभी सुविधाएं होंगी जो हवाई अड्डों पर मिलती हैं। उन्होंने बताया कि लखनऊ के गोमती नगर में एक हजार करोड़ रुपये की लागत से ऐसा बस अड्डा बनाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि आज 49 बस अड्डों के लिए मंजूरी मिलने के साथ ही अब प्रदेश के कुल 52 जिलों को इसके तहत आच्छादित किया जा रहा है और जो 23 जिले बच जाएंगे उनमें अगले चरण में बस अड्डे बनाने की कोशिश की जाएगी।

परिवहन राज्य मंत्री ने बताया कि इन नये बस अड्डों के निर्माण के लिये बहुत जल्द निविदा जारी की जाएगी और जो भी विकासकर्ता आएंगे, उन्हीं में से एक का चयन किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इससे करीब 4000 करोड रुपये का निवेश आएगा और इससे पहले जो 23 बस अड्डे स्वीकृत हुए थे उनके लिए करीब 2500 करोड रुपये का निवेश आया था।

बस अड्डे पर शॉपिंग मॉल, रेस्तरां और सिनेमा घर बनाए जाने के औचित्य के बारे में पूछे गए सवाल पर परिवहन राज्य मंत्री ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि शहर में यात्रियों की भीड़ को कम करने के लिए उन्हें बस अड्डे पर ही ठहरने, भोजन करने और खरीदारी करने की सुविधा दे दी जाए। बस अड्डे पर ही हर तरह की सुविधा उपलब्ध कराने का विचार है।’’

उन्होंने कहा कि इन बस अड्डों का 55 प्रतिशत हिस्सा जन सुविधा से जुड़ी व्यवस्थाओं के लिए उपयोग किया जाएगा, जबकि बाकी 45 प्रतिशत भाग व्यावसायिक उपयोग के लिए किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि ये यह बस अड्डे दो वर्ष के अंदर बनकर तैयार हो जाएंगे।

सिंह ने बताया कि एक अन्य प्रस्ताव के तहत हाथरस जिले में सिकंदरा राऊ में कृषि विभाग की दो हेक्टेयर जमीन, बुलंदशहर के डिबाई में सिंचाई विभाग की 1.12 हेक्टेयर जमीन और बलरामपुर के तुलसीपुर में हर्रेया तिराहा और देवीपाटन मंदिर के बीच में स्थित दो हेक्टेयर जमीन बस अड्डा बनाने के लिए परिवहन विभाग को नि:शुल्क दिये जाने के प्रस्तावों को भी मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है।

भाषा सलीम मनीषा संतोष

संतोष


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