भगवान राम से संबंधित बयान के लिए राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की याचिका पर फिर से सुनवाई का आदेश
भगवान राम से संबंधित बयान के लिए राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की याचिका पर फिर से सुनवाई का आदेश
वाराणसी (उप्र), 10 जून (भाषा) वाराणसी की एक सांसद-विधायक अदालत ने बुधवार को निचली अदालत के एक आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक अमेरिकी विश्वविद्यालय में भगवान राम को एक पौराणिक व काल्पनिक व्यक्ति बताने संबंधी कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की टिप्पणी के लिए उनके खिलाफ दर्ज शिकायत खारिज कर दी गई थी।
मामले से जुड़े वकील हरिशंकर पांडे ने कहा कि शिकायत अमेरिका के बोस्टन में स्थित ब्राउन यूनिवर्सिटी में 2025 में एक कार्यक्रम के दौरान गांधी के कथित बयान से संबंधित है।
शिकायतकर्ता के अनुसार गांधी ने भगवान राम को करुणा, क्षमा और धार्मिकता का प्रतीक करार देते हुए उन्हें एक पौराणिक व्यक्ति बताया था।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस टिप्पणी से लाखों हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
पांडे ने कहा कि शिकायत को पहले वाराणसी में एक अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) अदालत ने इस आधार पर खारिज कर दिया था कि कथित बयान विदेश में दिया गया था और इसलिए अभियोजन के लिए केंद्र सरकार की ओर से मंजूरी की आवश्यकता होगी।
पांडे ने कहा कि आदेश के खिलाफ एक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए, सांसद-विधायक अदालत के न्यायाधीश यजुर्वेद विक्रम सिंह ने निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया और कहा कि शिकायत दर्ज होने या उस पर विचार करने के चरण में केंद्र सरकार से पूर्व मंजूरी की आवश्यकता नहीं है।
पांडे ने बताया कि अदालत ने कहा कि हालांकि गांधी संसद सदस्य हैं, लेकिन वह लोक सेवकों की श्रेणी में नहीं आते, जिनके लिए ऐसी परिस्थितियों में विशेष अभियोजन मंजूरी अनिवार्य है।
न्यायाधीश ने माना कि शिकायत को तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने निचली अदालत को मामले पर पुनर्विचार करने और तथ्यों व कानून के अनुसार आदेश पारित करने का निर्देश दिया।
अब निचली अदालत इस मामले की नए सिरे से सुनवाई करेगी।
भाषा सं जफर जोहेब
जोहेब

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