आदेशों की अवहेलना पर मूक दर्शक नहीं रह सकती अदालतें : इलाहाबाद उच्च न्यायालय

आदेशों की अवहेलना पर मूक दर्शक नहीं रह सकती अदालतें : इलाहाबाद उच्च न्यायालय

आदेशों की अवहेलना पर मूक दर्शक नहीं रह सकती अदालतें : इलाहाबाद उच्च न्यायालय
Modified Date: May 22, 2026 / 11:30 pm IST
Published Date: May 22, 2026 11:30 pm IST

लखनऊ, 22 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने फैजुल्लागंज वार्ड के निर्वाचित पार्षद को शपथ न दिलाए जाने पर लखनऊ की महापौर की प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां निलंबित करते हुए कहा कि संवैधानिक अदालतें उन मामलों में मूक दर्शक नहीं रह सकतीं जहां वैधानिक प्राधिकारी बार-बार आदेशों की अवहेलना करें।

अदालत ने महापौर की अनुपस्थिति को आकस्मिक मानते हुए लखनऊ नगर निगम का कामकाज जारी रखने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी की खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को राज्य सरकार को आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। मामले में अगली सुनवाई 29 मई को होगी।

पीठ ने चेतावनी दी कि तब तक आदेश का पालन न होने पर महापौर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर बताना होगा कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।

इस मामले में विस्तृत आदेश उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर शुक्रवार को अपलोड किया गया। इसमें पीठ ने कहा, ‘‘संवैधानिक न्यायालय उन मामलों में मूक दर्शक नहीं रह सकते जहां वैधानिक प्राधिकारी बार-बार आदेशों की अवहेलना करें। संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दी गई शक्ति में न्यायिक निर्देशों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने की सहायक शक्तियां भी शामिल हैं। केवल आदेश जारी करना और अनुपालन न कराना न्यायालय के अधिकार को निष्प्रभावी बना देगा।’’

यह आदेश नवनिर्वाचित पार्षद ललित किशोर तिवारी की याचिका पर दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि महापौर की शक्तियों का निलंबन दंडात्मक नहीं, बल्कि न्यायिक निर्देशों के अनुपालन के लिए संवैधानिक उपाय है। पीठ ने कहा, ‘‘जब तक दंडात्मक संवैधानिक उपाय नहीं अपनाए जाते, महापौर की बार-बार अवज्ञा न्यायालय के आदेशों का उपहास करेगी और कानून के शासन को कमजोर करेगी।’’

इससे पहले 13 मई को उच्च न्यायालय ने महापौर को सात दिन के भीतर याचिकाकर्ता को शपथ दिलाने और अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। साथ ही चेतावनी दी थी कि अनुपालन न होने पर महापौर और लखनऊ जिलाधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।

सुनवाई के दौरान महापौर ने लू लगने और 20 मई को कमांड अस्पताल में भर्ती होने का हवाला देकर व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट मांगी। हालांकि, अदालत ने पाया कि उनके हलफनामे में आदेश के अनुपालन या शपथ दिलाने के इरादे का कोई उल्लेख नहीं था।

पीठ ने कहा कि चुनाव न्यायाधिकरण द्वारा याचिकाकर्ता को निर्वाचित घोषित करने के बावजूद उन्हें शपथ नहीं दिलाई गई, जिससे वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया से वंचित हैं। अदालत ने यह भी कहा कि लखनऊ नगर निगम के वकील एसएस चौहान शपथ दिलाने में लगने वाले समय पर जवाब नहीं दे सके, जो जानबूझकर अवहेलना दर्शाता है।

उच्च न्यायालय ने अतिरिक्त महाधिवक्ता अनुज कुदेसिया को राज्य सरकार को तुरंत सूचित करने का निर्देश दिया, ताकि उचित आदेश पारित कर अदालत के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

अदालत ने कहा कि महापौर अपने वैधानिक कर्तव्य में पूरी तरह विफल रहीं।

भाषा सं आनन्द गोला

गोला


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