लखनऊ में घरेलू सहायिका की बेटी ने नीट परीक्षा में सफलता हासिल की

लखनऊ में घरेलू सहायिका की बेटी ने नीट परीक्षा में सफलता हासिल की

लखनऊ में घरेलू सहायिका की बेटी ने नीट परीक्षा में सफलता हासिल की
Modified Date: July 17, 2026 / 07:34 pm IST
Published Date: July 17, 2026 7:34 pm IST

लखनऊ, 17 जुलाई (भाषा) लखनऊ में घर-घर जाकर घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली एक महिला की बेटी ने राष्‍ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) में सफलता हासिल करके इस कहावत को चरितार्थ कर दिया कि ‘प्रतिभाएं परिस्थितियों की मोहताज नहीं होतीं’।

गोमती नगर इलाके के एक गांव में रहने वाली नीलू ने आठवीं कक्षा में ही इलाज के अभाव में अपने पिता को खो दिया था, क्योंकि परिवार उनके इलाज का खर्च उठाने में सक्षम नहीं था।

इस निजी दुख ने ही नीलू को चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया।

नीलू ने कहा, ‘‘मेरे पिता की मौत इसलिए हुई क्योंकि हम इलाज का खर्च नहीं उठा सके।’’

छात्रा ने कहा, ‘‘पिता की मौत ने मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। मैंने चिकित्सक बनने का फैसला किया ताकि किसी भी परिवार को सिर्फ गरीबी की वजह से अपने किसी प्रियजन को न खोना पड़े।’’

उसने अपनी पढ़ाई ‘प्रेरणा बालिका स्कूल’ से की, जिसे ‘स्टडी हॉल एजुकेशन फाउंडेशन’ (शेफ) पिछड़े समुदायों की लड़कियों के लिए संचालित करता है।

नीलू को 11वीं और 12वीं कक्षा की पढ़ाई के लिए ‘स्टडी हॉल स्कूल’ में वजीफा मिला।

नीलू ने इसी साल सीबीएसई के तहत 12वीं कक्षा की परीक्षा में 94 प्रतिशत अंक हासिल किए। स्कूल की पढ़ाई के साथ-साथ उसने नीट की भी तैयारी की।

नीलू को एक स्कॉलरशिप भी मिली है, जिसके तहत कार्डियोलॉजिस्ट बनने के उसके सपने को पूरा करने के लिए उसकी पढ़ाई समेत अन्य जरूरतों पर आने वाले खर्च उठाए जाएंगे।

नीलू की मां परिवार में कमाने वाली अकेली सदस्य हैं, जो अस्पताल में अटेंडेंट का काम करने के साथ घर-घर जाकर घरेलू सहायिका के रूप में काम करती हैं।

रिश्तेदारों और समुदाय के लोगों ने नीलू की मां को सलाह दी कि वह अपनी बेटियों की पढ़ाई रोककर उनकी शादी करा दें। लेकिन नीलू की मां रिश्तेदारों के दबाव के आगे नहीं झुकीं और बेटियों को पढ़ाना जारी रखा।

नीलू ने कहा, ‘‘स्कूल में मेरे शिक्षकों ने मुझे विश्वास दिलाया कि शिक्षा हमारी जिंदगी बदल सकती है, चाहे हम कहीं से भी आए हों। मेरी सफलता वह सबसे बड़ा तोहफा है जो मैं अपने स्कूल और परिवार को दे सकती हूं। मुझे उम्मीद है कि मेरा सफर अन्य छात्रों को बड़े सपने देखने और बदलाव लाने के लिए प्रेरित करेगा।’’

शेफ की संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) उर्वशी साहनी ने कहा कि नीलू की सफलता अच्छी शिक्षा और मेहनत का परिणाम है। ‘स्टडी हॉल स्कूल’ की प्रधानाचार्य मीनाक्षी बहादुर ने नीलू को बहुत मेहनती छात्रा बताया।

भाषा चंदन आनन्द रवि कांत संतोष

संतोष


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