उप्र : शिवसेना ने श्रावण में ज्ञानवापी परिसर में नमाज पर रोक लगाने की मांग की

उप्र : शिवसेना ने श्रावण में ज्ञानवापी परिसर में नमाज पर रोक लगाने की मांग की

उप्र : शिवसेना ने श्रावण में ज्ञानवापी परिसर में नमाज पर रोक लगाने की मांग की
Modified Date: July 17, 2026 / 04:18 pm IST
Published Date: July 17, 2026 4:18 pm IST

वाराणसी, 17 जुलाई (भाषा) शिवसेना की उत्तर प्रदेश इकाई ने श्रावण माह के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में नमाज अदा करने पर रोक लगाने की मांग की है।

पार्टी का दावा है कि इससे समीप स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं।

शिवसेना की उत्तर प्रदेश इकाई के उप प्रमुख अजय चौबे ने मंदिर प्रशासन को सौंपे एक पत्र में श्रावण मास के दौरान मस्जिद परिसर में नमाज पर रोक लगाने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

चौबे ने बताया कि यह पत्र मंदिर प्रशासन की वार्षिक बैठक के दौरान सौंपा गया।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने मंदिर प्रशासन को अवगत कराया है कि पवित्र श्रावण मास के दौरान मस्जिद परिसर में नमाज अदा किए जाने से श्रद्धालु भावनात्मक रूप से आहत होते हैं।’’

चौबे ने दावा किया कि ज्ञानवापी परिसर में श्रृंगार गौरी, काशी विश्वनाथ मंदिर और आदि विश्वेश्वर मंदिर जैसे महत्वपूर्ण हिंदू धार्मिक स्थल स्थित हैं तथा श्रावण मास में बड़ी संख्या में कांवड़िये दर्शन के लिए कतारों में खड़े रहते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘जब नमाज के लिए टोपी पहनकर लोग ज्ञानवापी परिसर में प्रवेश करते हैं तो श्रद्धालु व्यथित हो जाते हैं और इसे सनातन धर्म का अपमान मानते हैं। हमने मंदिर प्रशासन से अनुरोध किया है कि श्रावण माह के दौरान मस्जिद परिसर में नमाज पर रोक लगाई जाए।’’

इस वर्ष श्रावण मास 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक रहेगा।

चौबे के अनुसार, मंदिर प्रशासन ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि उनकी मांग पर विचार किया जाएगा।

वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर से सटे ज्ञानवापी परिसर को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है।

हिंदू पक्षकारों का दावा है कि मस्जिद का निर्माण पहले से मौजूद एक मंदिर को ध्वस्त कर किया गया था। उन्होंने परिसर के भीतर स्थित श्रृंगार गौरी सहित अन्य स्थलों पर पूजा-अर्चना के अधिकार की मांग की है। वहीं, अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति ने इन दावों का विरोध किया है। यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

भाषा

सं, जफर रवि कांत


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