हाथरस के सहपऊ में रावण का पुतला जलाया

हाथरस के सहपऊ में रावण का पुतला जलाया

हाथरस के सहपऊ में रावण का पुतला जलाया
Modified Date: March 29, 2026 / 09:02 am IST
Published Date: March 29, 2026 9:02 am IST

हाथरस (उप्र), 29 मार्च (भाषा) हाथरस जिले के सहपऊ में चैत्र नवरात्र की दशमी पर शनिवार को रावण का पुतला जलाया गया। आयोजकों ने यह जानकारी दी।

देश में प्रायः शारदीय नवरात्र की विजयादशमी के दिन रावण का पुतला दहन करने की परंपरा है, लेकिन हाथरस जिले के सहपऊ में चैत्र नवरात्र की दशमी या उसके बाद रावण का पुतला जलाया जाता है।

आयोजकों ने बताया कि भगवान राम के स्वरूप (नाट्य रूपांतरण) ने अग्निबाण छोड़ा, जिसके बाद रावण का पुतला धूं-धूं कर जल उठा।

रामलीला महोत्सव समिति के अध्यक्ष देवेंद्र कुमार वार्ष्णेय ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘सहपऊ में चैत्र माह के नवरात्र के बाद रावण का पुतला जलाया जाता है, जबकि अन्य स्थानों पर यह परंपरा शारदीय नवरात्र के दौरान होती है।’’

वार्ष्णेय ने कहा, ‘‘शनिवार को यहां केवल रावण का पुतला जलाया गया। भगवान राम का किरदार निभाने वाले कलाकार ने अग्निबाण चलाया और रावण का पुतला आग की लपटों में घिरकर जल उठा।’’

उन्होंने बताया कि इस कस्बे में दशहरा, अर्थात शारदीय नवरात्र की विजयदशमी के दिन न तो रामलीला का आयोजन होता है और न ही रावण का पुतला जलाया जाता है।

वार्ष्णेय ने बताया कि बुजुर्गों द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाने वाली कथाओं के मुताबिक, लगभग 150 से 200 वर्ष पहले इस क्षेत्र में एक महामारी फैली थी। उस समय स्थानीय लोगों ने हवन किया था।

उन्होंने कहा, ‘‘बाद में बुद्धिजीवियों के एक समूह ने रामलीला का आयोजन किया और रावण का पुतला जलाकर समुदाय को महामारी से मुक्ति दिलाई। तब से इस क्षेत्र में उस प्रकार की कोई महामारी दोबारा नहीं फैली है।’’

उन्होंने बताया कि शनिवार को हनुमान टीले पर रावण का पुतला जलाया गया और दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से भी लोग उत्साहपूर्वक इस आयोजन में शामिल हुए।

शनिवार को सहपऊ में उत्सव का माहौल रहा। कस्बे के मेला मैदान में दैनिक उपयोग की वस्तुओं, बच्चों के खिलौनों, मनोरंजन के साधनों, विभिन्न व्यंजनों के स्टॉल और अलग-अलग तरह के झूले लगाए गए थे।

स्थानीय लोगों के अनुसार, केवल कोरोना महामारी के दौरान ही यह आयोजन नहीं हो सका था।

भाषा सं आनन्द खारी

खारी


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