Escort Allowance For Students: भाजपा सरकार का बड़ा फैसला, इन स्कूली छात्रों को हर महीने मिलेंगे 600 रुपए, इस तारीख तक जारी होगी राशि

भाजपा सरकार का बड़ा फैसला, इन स्कूली छात्रों को हर महीने मिलेंगे 600 रुपए, Escort Allowance For Disabled Students in Uttar Pradesh

Escort Allowance For Students: भाजपा सरकार का बड़ा फैसला, इन स्कूली छात्रों को हर महीने मिलेंगे 600 रुपए, इस तारीख तक जारी होगी राशि
Modified Date: August 9, 2026 / 05:51 pm IST
Published Date: August 9, 2026 5:51 pm IST

लखनऊ। Escort Allowance For Disabled Students गंभीर और बहु दिव्यांग बच्चों को स्कूल तक पहुंचने में होने वाली परेशानी अब उनकी पढ़ाई में बाधा नहीं बनेगी। उत्तर प्रदेश सरकार ने पहली बार परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए एस्कार्ट एलाउंस देने का निर्णय लिया है। इसके तहत कक्षा एक से आठ तक के 14,152 पात्र विद्यार्थियों को 600 रुपये प्रतिमाह की दर से 10 माह तक आर्थिक सहायता दी जाएगी।

Escort Allowance For Disabled Students इस योजना पर कुल 849.12 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। एस्कार्ट एलाउंस की राशि विद्यार्थियों के माता-पिता के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी। इसका उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने में अभिभावकों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना और उनकी विद्यालय में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना है।

इन विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

एस्कार्ट एलाउंस के लिए पूर्ण दृष्टि दिव्यांग, बौद्धिक दिव्यांग, सेरेब्रल पाल्सी, बहु दिव्यांग तथा जापानी इंसेफलाइटिस (जेई) और एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से प्रभावित पात्र विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। योजना का लाभ लेने के लिए विद्यार्थियों का विद्यालय में नियमित रूप से उपस्थित रहना जरूरी होगा।

31 अगस्त तक भुगतान के निर्देश

समग्र शिक्षा परियोजना निदेशालय की ओर से सभी जिलों के लिए पात्र विद्यार्थियों की सूची और निर्धारित धनराशि जारी कर दी गई है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पात्र विद्यार्थियों को 31 अगस्त तक एस्कार्ट एलाउंस का भुगतान सुनिश्चित कराया जाए। सरकार की इस पहल से दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए स्कूल तक पहुंचना आसान होने के साथ ही उन्हें नियमित रूप से शिक्षा से जोड़े रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। योजना का उद्देश्य आर्थिक और शारीरिक कठिनाइयों के कारण पढ़ाई से दूर होने वाले बच्चों की विद्यालय में उपस्थिति बढ़ाना भी है।

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