गोरखपुर एम्स में आठ माह की गर्भवती महिला में मिला ‘ए’ रक्त समूह के अत्यंत दुर्लभ उपसमूह ‘ए3’

गोरखपुर एम्स में आठ माह की गर्भवती महिला में मिला 'ए' रक्त समूह के अत्यंत दुर्लभ उपसमूह 'ए3'

गोरखपुर एम्स में आठ माह की गर्भवती महिला में मिला ‘ए’ रक्त समूह के अत्यंत दुर्लभ उपसमूह ‘ए3’
Modified Date: March 14, 2026 / 07:36 pm IST
Published Date: March 14, 2026 7:36 pm IST

गोरखपुर (उप्र), 14 मार्च (भाषा) अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्‍स) गोरखपुर के डॉक्टरों ने आठ महीने की एक गर्भवती महिला में ‘ए’ रक्त समूह के एक अत्यंत दुर्लभ उपसमूह ‘ए3’ की पहचान की है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

उन्‍होंने बताया कि इस महिला को नियमित रक्त समूह जांच में कुछ विसंगतियां पाए जाने के बाद यहां स्थानांतरित किया गया था।

उन्होंने कहा कि यह खोज संस्थान के ‘ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग’ द्वारा एक विस्तृत मूल्यांकन के दौरान की गई, जो उन्नत रक्त समूह निदान और सुरक्षित रक्त आधान पद्धतियों में संस्थान की बढ़ती क्षमताओं को उजागर करती है।

विभाग के प्रभारी सौरभ मूर्ति ने बताया कि ”सामान्य ‘ए’ रक्त समूह की तुलना में ‘ए’ उपसमूहों में लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसीएस) की सतह पर ‘ए’ एंटीजन का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर होता है।

उन्होंने कहा कि इस कारण, नियमित रक्त समूह जांच में कभी-कभी विसंगतियां दिखाई दे सकती हैं, जिससे सही रक्त प्रकार निर्धारित करने के लिए उन्नत सीरोलॉजिकल परीक्षण आवश्यक हो जाता है।

उन्होंने कहा कि ‘ए3’ उपसमूह बेहद दुर्लभ है और अध्ययनों से पता चलता है कि भारत की कुछ क्षेत्रीय आबादी में इसकी आवृत्ति लगभग 33,000 व्यक्तियों में से एक है।

यह मूल्यांकन मोनिशा और निरंजन (सीनियर रेजिडेंट) तथा पर्शा (जूनियर रेजिडेंट) की एक टीम द्वारा किया गया था। हाल में संस्थान ने एक अन्य मरीज में भी दुर्लभ बॉम्बे (ओएच) रक्त समूह की पहचान की थी।

टीम को बधाई देते हुए एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक और सीईओ विभा दत्ता ने कहा कि संस्थान पूर्वांचल के मरीजों को उन्नत ‘डायग्नोस्टिक’ और ‘ट्रांसफ्यूजन’ सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

भाषा सं आनन्द

राजकुमार

राजकुमार


लेखक के बारे में