गजनवी का मकसद भारत की सनातन परंपरा को नष्ट करना था:योगी आदित्यनाथ

गजनवी का मकसद भारत की सनातन परंपरा को नष्ट करना था:योगी आदित्यनाथ

गजनवी का मकसद भारत की सनातन परंपरा को नष्ट करना था:योगी आदित्यनाथ
Modified Date: September 24, 2026 / 05:05 pm IST
Published Date: September 24, 2026 5:05 pm IST

गोरखपुर (उप्र), 24 सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनवी के आक्रमण का हवाला देते हुए बृहस्पतिवार को दावा किया कि विदेशी आक्रांताओं का उद्देश्य भारत की संपदा के साथ ही इसके बौद्धिक एवं सनातन विरासत को नष्ट करना था।

मुख्यमंत्री ने यहां गोरखनाथ मंदिर में भारतीय ज्ञान परंपरा पर एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा, “जब महमूद गजनवी सोमनाथ मंदिर को ध्वस्त करने गया तो पुजारियों ने उसे मंदिर या प्रतिमा को नुकसान नहीं पहुंचाने को कहा और इसके बदले जितना चाहे उतना सोना एवं आभूषण ले लेने को कहा।”

आदित्यनाथ ने कहा, “उसने कहा, “मैं यहां केवल लूटने नहीं आया हूं। जो कुछ भी मिलेगा, मैं उठा ले जाऊंगा। मेरा उद्देश्य भारत की सनातन परंपरा को नष्ट करना है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि आक्रांताओं का उद्देश्य केवल भारत की संपदा को लूटना नहीं था, बल्कि भारत का ज्ञान पूरी तरह से नष्ट करना था।

उन्होंने कहा कि भारत को इसके ज्ञान की विरासत के कारण कभी विश्वगुरु के तौर पर जाना जाता था।

उन्होंने कहा, “भारत में सर्वोत्तम जलवायु, सबसे अधिक उपजाऊ भूमि और पर्याप्त जल संसाधन है, लेकिन प्राचीन दुनिया में इसकी पहचान क्या थी। हमें हमारी ज्ञान परंपरा के कारण विश्वगुरु कहा जाता था। ज्ञान की विरासत पर हमारा एकाधिकार था।”

मौजूदा समय के विकसित देशों की तुलना भारत के प्राचीन संस्थानों से करते हुए आदित्यनाथ ने कहा, “आज के विकसित देशों का इतिहास केवल 400-500 साल पुराना है, जबकि भारत में 2600 वर्षों पूर्व तक्षशिला और 1700-1800 वर्षों पूर्व नालंदा जैसे संस्थान थे।”

उन्होंने कहा, “हमने ज्ञान को साक्षरता या पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं कर रखा था। हमने कहा, विद्या सा विमुक्तये यानी ज्ञान वह है जो मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करे।”

मुख्यमंत्री ने भारत की परंपरागत ज्ञान प्रणालियों पर अंग्रेजी व्यवस्था के प्रभाव को लेकर कहा कि अंग्रेजों ने भारत की अपनी बौद्धिकता और चिकित्सा परंपराओं के बारे में भ्रम पैदा किया, फलस्वरूप ‘‘हम धीरे धीरे अपनी परंपराओं से दूर होते गए।’’

उन्होंने आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी का हवाला देते हुए कहा कि हाल के वर्षों में इन्हें व्यापक पहचान मिली है।

आदित्यनाथ ने भारत के प्राचीन ज्ञान को लेकर अधिक अनुसंधान और संरक्षण का आह्वान करते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को युवा पीढ़ियों का परिचय बौद्धिक विरासत से कराना चाहिए।

आदित्यनाथ ने पाणिनी, पतंजलि, चाणक्य और नैमिषारण्य से जुड़ी ज्ञान परंपराओं का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने व्याकरण, अर्थशास्त्र, विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान, चिकित्सा, संगीत, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान किया।

भाषा राजेंद्र

राजकुमार

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