नेहरू जीवित रहे होते तो कांशीराम कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री होते : राहुल गांधी
नेहरू जीवित रहे होते तो कांशीराम कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री होते : राहुल गांधी
लखनऊ, 13 मार्च (भाषा) लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को दावा किया कि अगर भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू जीवित रहे होते तो कांशीराम कांग्रेस की तरफ से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होते। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने अपना काम ठीक से किया होता तो कांशीराम कभी सफल नहीं होते।
नेहरू का निधन 1964 में हुआ था। वहीं कांशी राम 1978 में पिछड़े वर्गों के हितों की वकालत करने वाले संगठन बामसेफ की स्थापना के साथ राजनीतिक परिदृश्य में उभरे। इसके बाद उन्होंने 1984 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का गठन किया।
उन्होंने कांशीराम की जयंती (15 मार्च) से दो दिन पूर्व यहां इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित संविधान सम्मेलन में डॉक्टर भीमराव आंबेडकर और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक कांशीराम की सराहना की।
गांधी ने कहा, ”कांशीराम जी समाज में बराबरी की बात करते थे। कांग्रेस अपना काम पूरी तरह से नहीं कर सकी। यही कारण है कि कांशीराम जी सफल हुए। अगर कांग्रेस ठीक तरह से काम करती तो कांशीराम जी कभी सफल न होते।”
उन्होंने कहा, ”अगर जवाहर लाल नेहरू जी जिंदा रहे होते तो कांशीराम जी कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते।”
उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सरकार ने 85 प्रतिशत आबादी की अनदेखी की है।
गांधी ने कहा, ”संविधान कहता है कि यह देश सबका है और सभी लोग समान हैं, लेकिन आज समाज को 15 और 85 प्रतिशत में बांट दिया गया है और फायदा केवल 15 प्रतिशत लोगों को मिल रहा है।”
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि महात्मा गांधी, भीमराव आंबेडकर और कांशीराम तथा सावरकर के बीच एक बड़ा अंतर है।
राहुल गांधी ने इसकी व्याख्या करते हुए कहा, ‘गांधी जी 10-15 साल जेल में रहे, लेकिन उन्होंने समझौता नहीं किया। बाबासाहेब आंबेडकर ने अपना जीवन समर्पित कर दिया, लेकिन समझौता नहीं किया। कांशीराम ने जीवन में कभी समझौता नहीं किया क्योंकि वह ऐसा कर ही नहीं सकते थे।”
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) में भी पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित और आदिवासी समाज की भागीदारी नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में नाथूराम गोडसे और सावरकर के विचार नहीं हैं, बल्कि यह महात्मा गांधी, भीमराव अंबेडकर और कांशीराम के विचारों पर आधारित है।
कांग्रेस सांसद ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाया कि वह संविधान की भावना को नहीं मानते और उन्होंने देश की ऊर्जा सुरक्षा से भी समझौता किया है।
संसद में बृहस्पतिवार को दिए अपने भाषण का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, ”मुद्दा यह है कि लोगों को एलपीजी सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। हमारी ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। अगर आज अमेरिका हमसे कहता है कि हम रूस, ईरान, इराक या किसी भी दूसरे देश से तेल और गैस खरीदें, तो इसका मतलब है कि हमारी ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।’
भाषा अरुणव आनन्द
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