नेहरू जीवित रहे होते तो कांशीराम कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री होते : राहुल गांधी

नेहरू जीवित रहे होते तो कांशीराम कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री होते : राहुल गांधी

नेहरू जीवित रहे होते तो कांशीराम कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री होते : राहुल गांधी
Modified Date: March 13, 2026 / 11:27 pm IST
Published Date: March 13, 2026 11:27 pm IST

लखनऊ, 13 मार्च (भाषा) लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को दावा किया कि अगर भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू जीवित रहे होते तो कांशीराम कांग्रेस की तरफ से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होते।

उन्‍होंने हालांकि यह भी कहा कि कांग्रेस ने अपना काम ठीक से किया होता तो कांशीराम कभी सफल नहीं होते।

नेहरू का निधन 1964 में हुआ था।

वहीं कांशी राम 1978 में पिछड़े वर्गों के हितों की वकालत करने वाले संगठन बामसेफ की स्थापना के साथ राजनीतिक परिदृश्य में उभरे।

इसके बाद उन्होंने 1984 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का गठन किया।

उन्‍होंने कांशीराम की जयंती (15 मार्च) से दो दिन पूर्व यहां इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित संविधान सम्मेलन में डॉक्टर भीमराव आंबेडकर और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक कांशीराम की सराहना की।

राहुल ने कहा, “कांशीराम जी समाज में बराबरी की बात करते थे। कांग्रेस अपना काम पूरी तरह से नहीं कर सकी। यही कारण है कि कांशीराम जी सफल हुए। अगर कांग्रेस ठीक तरह से काम करती तो कांशीराम जी कभी सफल न होते।”

उन्होंने कहा, “अगर जवाहर लाल नेहरू जी जिंदा रहे होते तो कांशीराम जी कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते।”

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने 85 प्रतिशत आबादी की अनदेखी की है।

राहुल ने कहा, “संविधान कहता है कि यह देश सबका है और सभी लोग समान हैं, लेकिन आज समाज को 15 और 85 प्रतिशत में बांट दिया गया है और फायदा केवल 15 प्रतिशत लोगों को मिल रहा है।”

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि महात्मा गांधी, भीमराव आंबेडकर और कांशीराम तथा सावरकर के बीच एक बड़ा अंतर है।

उन्होंने ने इसकी व्याख्या करते हुए कहा, “गांधी (महात्मा गांधी) जी 10-15 साल जेल में रहे, लेकिन उन्होंने समझौता नहीं किया। बाबासाहेब आंबेडकर ने अपना जीवन समर्पित कर दिया, लेकिन समझौता नहीं किया। कांशीराम ने जीवन में कभी समझौता नहीं किया क्योंकि वह ऐसा कर ही नहीं सकते थे।”

राहुल ने आरोप लगाया कि आरएसएस (राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ) में भी पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित और आदिवासी समाज की भागीदारी नहीं है।

उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में नाथूराम गोडसे और सावरकर के विचार नहीं हैं, बल्कि यह महात्मा गांधी, भीमराव अंबेडकर और कांशीराम के विचारों पर आधारित है।

कांग्रेस सांसद ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाया कि वह संविधान की भावना को नहीं मानते और उन्होंने देश की ऊर्जा सुरक्षा से भी समझौता किया है।

उन्‍होंने संसद में बृहस्पतिवार को दिए अपने भाषण का जिक्र करते हुए कहा, “मुद्दा यह है कि लोगों को एलपीजी सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। हमारी ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। अगर आज अमेरिका हमसे कहता है कि हम रूस, ईरान, इराक या किसी भी दूसरे देश से तेल और गैस खरीदें, तो इसका मतलब है कि हमारी ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।”

एक बयान के मुताबिक, “राहुल गांधी ने कहा कि मंत्री हरदीप पुरी पहले से ही ‘कम्प्रोमाइजड’ हैं। इनका नाम एप्स्टीन फाइलस में है और ये एप्स्टीन के दोस्त रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “हरदीप पुरी की बेटी की कंपनी में जॉर्ज सोरोस का पैसा लगा है, जैसे ही मैंने संसद में ये बात रखी तो अध्यक्ष ने फिर मुझे बोलने से रोक दिया।”

कांग्रेस नेता ने कहा “मोदी जी के सरेंडर करने के कारण केवल दो हैं, एक एप्स्टीन और दूसरा अदाणी। अदाणी का जो मामला अमेरिका में चल रहा है, उसमें खुद मोदी भी संलिप्त हैं इसी वजह से नरेन्द्र पूरी तरह से सरेंडर हो गए हैं।”

उन्होंने कहा “मोदी जी ‘साइकोलॉजिकल’ (मनोवैज्ञानिक) रूप से हार गए हैं और जब व्यक्ति मन से हारता है तो फिर उसको हारना ही होता है।”

राहुल ने कहा, “हक मांगने से नहीं मिलता बल्कि उसके लिए लड़ना पड़ता है। कांग्रेस पार्टी 85 प्रतिशत के शोषण की व्यवस्था को बदलने की लड़ाई लड़ रही है वह समय अब आ गया है।”

उन्होंने कहा, “यह लड़ाई ना केवल चुनाव जीतने की है बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की है। हक की लड़ाई विचारों की लड़ाई सबसे मजबूत होती है ,जो विचारों से समझौता नहीं करता है उसकी ही पूजा होती है।”

यह कार्यक्रम कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अनुसूचित जाति (एससी) विभागों तथा उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सहयोग से इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित किया गया।

पार्टी ने मंच से प्रस्ताव पारित कर कांशीराम को मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग की।

कांग्रेस का यह कदम 2027 चुनाव में दलितों को आकर्षित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

भाषा अरुणव आनन्‍द जितेंद्र

जितेंद्र


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