उच्च न्यायालय ने तलब किया पिछले दो साल में गुमशुदगी की दर्ज शिकायतों का विवरण

उच्च न्यायालय ने तलब किया पिछले दो साल में गुमशुदगी की दर्ज शिकायतों का विवरण

उच्च न्यायालय ने तलब किया पिछले दो साल में गुमशुदगी की दर्ज शिकायतों का विवरण
Modified Date: February 5, 2026 / 10:36 pm IST
Published Date: February 5, 2026 10:36 pm IST

लखनऊ, पांच फरवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश सरकार से पिछले दो सालों में राज्य भर में एक लाख से ज्यादा लोगों की गुमशुदगी की दर्ज शिकायतों से जुड़ा पूरा विवरण तलब किया ।

उच्च न्यायालय ने गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को अगली सुनवाई की तारीख पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश होने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई की तारीख 23 फरवरी नियत की गयी है।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। इस याचिका को अदालत ने लापता लोगों के मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लेते हुए दर्ज किया था।

राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सरकारी वकील वी. के सिंह ने खंडपीठ को बताया कि एक लाख से ज्यादा शिकायतों के आंकड़े को सुधारने की जरूरत है क्योंकि कई मामलों में लापता लोगों का पता चल गया होगा, लेकिन इसकी जानकारी अपडेट नहीं की गई थी।

सिंह ने न्यायालय को भरोसा दिलाया कि अगली सुनवाई में अद्यतन आंकड़े पेश किए जाएंगे।

इससे पहले, जनवरी 2026 के आखिरी हफ्ते में एक आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने टिप्पणी की, ”हम लापता लोगों से जुड़ी शिकायतों पर अधिकारियों के रवैये से हैरान हैं जिसमें साफ तौर पर अधिकारियों की तरफ से तुरंत कार्रवाई की जरूरत है।”

पीठ ने ये टिप्पणियां विक्रमा प्रसाद की एक याचिका की सुनवाई के दौरान कीं। प्रसाद ने आरोप लगाया था कि उनका बेटा जुलाई 2024 में लापता हो गया था और पुलिस ने उसे ढूंढने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।

पीठ ने सुनवाई के दौरान गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव से एक विस्तृत हलफनामा मांगा। हलफनामे के अनुसार एक जनवरी 2024 और 18 जनवरी 2026 के बीच पूरे राज्य में लगभग एक लाख आठ हजार 300 व्यक्तियों की गुमशुदगी की शिकायतें दर्ज की गईं लेकिन लापता व्यक्तियों को ढूंढने के लिए सिर्फ नौ हजार 700 मामलों में ही कार्रवाई की गई। बाकी मामलों में अभी तक कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी।

पीठ ने इन आंकड़ों पर ध्यान देते हुए पुलिस के ‘सुस्त रवैये’ पर नाराजगी जताई और इस मुद्दे को व्यापक जनहित का मामला मानते हुए अदालत की रजिस्ट्री को इस मामले को एक जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया था।

भाषा सं. सलीम राजकुमार

राजकुमार


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